छेड़खानी के चलते मां ने छुड़वा दी पढ़ाई, बच्ची ने डीसी अंकल से लगाई मदद की गुहार
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छेड़खानी के चलते मां ने छुड़वा दी पढ़ाई, बच्ची ने डीसी अंकल से लगाई मदद की गुहार
छठी की छात्रा अमृता कुमारी की पढ़ाई छेड़खानी के चलते छुड़वा दी गई

अमृता कुमारी की मां पैरवा देवी ने बताया कि उनकी दो बेटियों के साथ हादसे हो चुके हैं. ऐसे में वह तीसरी बेटी के साथ यह सब नहीं चाहती. इसलिए उसने स्कूल जाने से मना कर दिया. स्कूल के रास्ते में गांव के ही मनचले बच्चियों से छेड़खानी करते हैं.

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गुमला. जिले के पालकोट प्रखंड के कोलेंग नवाडीह गांव की दो बेटियां पढ़ना चाहती हैं. लेकिन एक की पढ़ाई छेड़खानी (Molestation) और दूसरे की गरीबी के चलते घरवालों ने छुड़वा दी. हालांकि अब इन बच्चियों की गुहार सुनकर बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के लोग सामने आए हैं. समिति की पहल पर जिले के उपायुक्त शशिरंजन ने इन बच्चियों का कस्तूरबा विद्यालय (Kasturba School) में एडमिशन कराने का भरोसा दिलाया है. दोनों बच्चियां गांव के ही स्कूल में कक्षा छह में पढ़ती थीं.

आगे पढ़ना चाहती हैं बच्चियां

छात्रा अमृता कुमारी ने बताया कि उनके घरवाले स्कूल जाने के दौरान बच्चियों के साथ होने वाली छेड़खानी और प्रेमजाल में फंसाने की कोशिश की खबर सुनकर परेशान रहते हैं. इसलिए घरवालों ने उसकी पढ़ाई बंद करवा दी. क्योंकि कुछ इसी तरह की घटना उसकी दो बड़ी बहनों के साथ पहले हो चुकी है. अमृता की माने तो वह पढ़ाई-लिखाई कर अपना बेहतर भविष्य बनाना चाहती है.



दूसरी छात्रा शंकुतला कुमारी का कहना है कि पिता की मौत के बाद घर की माली हालत खराब हो गई है. आर्थिक तंगी के कारण मां पढ़ाई का खर्चा नहीं उठा पा रही. इसलिए उसकी पढ़ाई बंद करवा दी. लेकिन वह पढ़ना चाहती है.



छेड़खानी के डर से छुड़वा दी पढ़ाई 

अमृता कुमारी की मां पैरवा देवी ने बताया कि उनकी दो बेटियों के साथ हादसे हो चुके हैं. ऐसे में वह तीसरी बेटी के साथ यह सब नहीं चाहती. इसलिए उसने स्कूल जाने से मना कर दिया. स्कूल के रास्ते में गांव के ही मनचले बच्चियों से छेड़खानी करते हैं. वहीं शंकुतला की मां अमीला देवी का कहना है कि गरीबी के चलते उनसे बेटी की पढ़ाई छुड़वा दी है. लेकिन सरकार की ओर से अगर उनकी बेटी की पढ़ाई की व्यवस्था हो जाए, तो वह आगे पढ़ने जाने देने को तैयार है.

डीसी ने कस्तूरबा विद्यालय में एडमिशन का दिलाया भरोसा

 

दोनों बच्चियों की कहानी जब इलाके की सेविका कलावती देवी को मालूम हुई, तो उन्होंने इस सिलसिले में जिला बाल कल्याण समिति को मदद करने की अपील की. समिति के लोगों ने भी इस बात को जिले के डीसी शशि रंजन तक पहुंचाई. डीसी ने कहा कि अगर बच्चियां पढ़ना चाहती हैं, तो उन्होंने इसके लिए सुविधाएं दी जाएंगी. बच्चियों का एडमिशन कस्तूरबा विद्यालय में कराया जाएगा.

इनपुट- सुशील कुमार

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