गुमला में 5 साल बाद नक्सलियों की गतिविधि तेज, ग्रामीणों को जंगल में नहीं घुसने का फरमान

गुमला में नक्सलियों ने 5 साल बाद फिर दस्तक दी है. (फाइल फोटो)

गुमला में नक्सलियों ने 5 साल बाद फिर दस्तक दी है. (फाइल फोटो)

Naxal Terror: ग्रामीणों ने बताया कि नक्सलियों के फरमान के कारण अब हमलोग गांव छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. हमलोग ये तय नहीं कर पा रहे कि कहा जाएं.

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रिपोर्ट- रुपेश भगत

गुमला. झारखंड के गुमला जिले में लगभग 5 वर्षों के बाद एक बार फिर नक्सलियों (Naxals) ने जोरदार दस्तक दी है. नक्सलियों ने जंगल के किनारे बसे 40 से 45 गांव के लोगों को जंगल में घुसने से रोक दिया है. ग्रामीणों (Villagers) को जंगल में वनोत्पाद चुनने और मवेशियों को चराने से मना कर दिया गया है. जिसके कारण ग्रामीण में खौफ का आलम है.

दरअसल पिछले महीने नक्सलियों के द्वारा जंगल में लगाये गये बम की चपेट में आने से मवेशी चराने गए एक ग्रामीण युवक का पैर उड़ गया था. इस घटना के बाद जंगल से सटे गांव के ग्रामीण भय के वातावरण में रह रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि नक्सलियों ने जंगल में कई जगह बम प्लांट कर दिया है. इसके कारण कुछ हादसे भी हो चुके हैं. पहले जंगल में हमलोग महुआ डोरी सहित कई प्रकार के वनोत्पाद चुनते थे. इससे हमारी रोजी-रोटी चलता थी. जंगल में मवेशी को भी चारा मिलता था. लेकिन माओवादियों के फरमान के बाद हमारे सामने विकट परिस्थिति उत्पन्न हो गई है.

कई ग्रामीणों ने दबी जुबान में बताया कि नक्सलियों के फरमान के कारण अब हमलोग गांव को छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. हमलोग ये तय नहीं कर पा रहे कि गांव में रहें या शहर में. गांव में रहते हैं तो नक्सलियों का फरमान, शहर जाएंगे तो रोजी- रोजगार की समस्या उत्पन्न होगी.
नक्सलियों की बढ़ती गतिविधि को लेकर जिले के एसपी हृदीप पी जनार्दनन ने बताया कि गुमला के जंगली क्षेत्र में पुलिस को क्षति पहुंचाने के लिए माओवादियों द्वारा बम प्लांट किया गया है. ऐसे में ग्रामीणों से अपील है कि जिन इलाकों में नक्सली गतिविधि देखी जा रही है, उसकी सूचना पुलिस को दे ताकि पुलिस कार्रवाई कर पाएगी.

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