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ड्राइवर के बेटे ने JPSC में हासिल की सफलता, पूरे परिवार ने जताई खुशी

जगरन्नाथ लोहरा के पिता कृष्णा लोहरा डीसी के ड्राईवर हैं. (जगरन्नाथ लोहरा की फाइल फोटो)

जगरन्नाथ लोहरा के पिता कृष्णा लोहरा डीसी के ड्राईवर हैं. (जगरन्नाथ लोहरा की फाइल फोटो)

झारखंड (Jharkhand) के गुमला (Gumla) जिले में सरकारी बाबुओं के ड्राईवर कृष्णा लोहरा (Krishna Lohra) के बेटे ने जेपीएससी (JPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे कुल का नाम रोशन कर दिया है.

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    गुमला. झारखंड (Jharkhand) के गुमला (Gumla) जिले में सरकारी बाबुओं के ड्राईवर कृष्णा लोहरा (Krishna Lohra) के बेटे ने जेपीएससी (JPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे कुल का नाम रोशन कर दिया है. उन्होंने न केवल परिवार के लिए गौरव का काम किया है, बल्कि उन्होंने साबित कर दिया की संसाधनों की कमी के बाद भी अगर सही लगन हो तो सफलता हासिल की जा सकती है. गुमला के करमटोली के रहने वाले जगरन्नाथ लोहरा ने जेपीएससी की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा तो मनवाया ही साथ ही उस पिता के सपने को भी पूरा किया, जो पूरी उम्र सरकारी अधिकारियों का वाहन चलाते रहे.

    पिता का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया
    जगरन्नाथ लोहरा के पिता कृष्णा लोहरा डीसी के ड्राईवर हैं. उनका सपना था कि उनका बेटा भी ऑफिसर बने, जिसे उनके बेटे ने पूरा कर दिया. जगरन्नाथ की मानें तो पूर्व में भी जेपीएससी में एक बार मुख्य परीक्षा में सफलता उन्होंने सफलता हासिल की थी, लेकिन वे इंटरव्यू में सफल नहीं हो पाए थे. इस बार उन्हें सफलता मिल गई. वहीं उनके पिता और मां को तो मानों वह मिल गया, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी ख्वाहिश थी. उनकी मानें तो आज उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया. कृष्णा लोहरा की इच्छा थी कि एक दिन अपने बेटे को ऑफिसर बनाकर उसकी गाड़ी को चलाए, जिसे ईश्वर ने पूरा कर दिया है.

    मां बोलीं, दुखों के दिनों का मिला इनाम
    जगरन्नाथ लोहरा की मां शांति देवी की मानें तो वे अनपढ़ महिला हैं, लेकिन अपने बच्चों को पूरी ईमानदारी से पढ़ाने का काम किया. उनकी मानें तो बच्चों की पढ़ाई के कारण उन लोगों ने अपने जीवन की तमाम ख्वाहिशों को भूला दिया. उनकी मानें तो आज बेटे की इस सफलता ने उन तमाम दुखों के दिनों का इनाम दे दिया है.

    पत्नी ने भी उन्हें पूरा सहयोग दिया
    दो साल पहले जगरन्नाथ से शादी कर उनके परिवार का हिस्सा बनीं उनकी पत्नी अनुराधा की मानें तो जब वह शादी के बाद ससुराल आईं तो पति के सिविल सर्विस के प्रति रुझान को देखकर उन्होंने भी उनकी पूरी मदद की. उनकी पढ़ाई को कभी भी बाधित करने की कोशिश नहीं की. साथ ही सारी इच्छाओं को मारकर रखा.

    परिवार के अन्य बच्चों को मिलेगी प्रेरणा
    जगरन्नाथ के चाचा दिलीप लोहरा जो समाहारनालय में एक क्लर्क हैं, उनकी मानें तो उनके पूरे परिवार का सपना था कि परिवार में कोई ऑफिसर बने जिसे उनके भतीजे ने पूरा कर दिया है. जगरन्नाथ का पूरा परिवार उत्साह मना रहा है. उनकी मानें तो इससे उनके परिवार के अन्य बच्चों को प्रेरणा मिलेगी और वह भी इनके रास्ते पर चलकर सफलता प्राप्त करेंगे. वहीं जगरन्नाथ लोहरा की इस सफलता उनके तीन भाई और एक बहन काफी खुश हैं.

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