स्वयं सहायता समूह से सशक्त हो रही आदिवासी महिलाएं
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स्वयं सहायता समूह से सशक्त हो रही आदिवासी महिलाएं
स्वयं सहायता समूह से सशक्त हो रही आदिवासी महिलाएं

पहले सरकारी योजनाओं से बेखबर रहने वाली आदिवासी महिलाएं आज बाखबर होकर अपने हक की आवाज उठाती हैं.

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गुमला में कल तक जो आदिवासी महिलाएं हड़िया दारु बेचने का काम करती थीं, वे अब स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर खुद और अपने परिवार की तकदीर बदल रही हैं. इसमें इन्हें सरकार और प्रशासन की मदद भी मिल रही है.

पहले सरकारी योजनाओं से बेखबर रहने वाली आदिवासी महिलाएं आज बाखबर होकर अपने हक की आवाज उठाती हैं. उनके आवाज को प्रशासन भी गंभीरता से ले रहा है और मदद का हाथ बढ़ा रहा है. लिहाजा ये महिलाएं आज खेती और मुर्गी पालन से जुड़कर परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही हैं.

जिले के विभिन्न इलाकों में सैकड़ों की संख्या में स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं. इससे हजारों महिलाएं जुड़ी हुई हैं. महिला स्वयं सहायता समूह, गुमला की अध्यक्ष की माने तो स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आज कई महिलाओं की ना केवल आर्थिक तंगी की समस्या का समाधान हुआ, बल्कि वे आज समाज के लिए मॉडल बनी चुकी हैं. महिलाओं की सोच में आये इस परिवर्तन पर जिला उप विकास आयुक्त नागेन्द्र सिन्हा का कहना है कि इन महिलाओं के कारण पूरे देश में गुमला की अलग पहचान स्थापित हो रही है.



गुमला जैसे आदिवासी बहुल जिले की महिलाएं कल तक पलायन कर दूसरे राज्यों में दाई-नौकर का काम करने के लिए चर्चा में रहती थीं. लेकिन सरकार की योजनाओं की मदद से ये महिलाएं अब जिले के लिए नई इबारत लिखने में जुटी हैं.
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