गुमला में चूल्हा जलाने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जारी
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गुमला में चूल्हा जलाने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जारी
पेड़ों की कटाई के लिए जाती महिलाएं

केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना गुमला जैसे आदिवासी बहुल जिले के अधिकतर इलाकों में पहुंच नहीं बना पाई है. इसके कारण लोग खाना बनाने के लिए जंगलों से पेड़ की कटाई करने को मजबूर हैं.

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गुमला के ग्रामीण इलाकों में लगातार जंगल की कटाई हो रही है, जिससे जंगल में पेड़ों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है. डीएफओ के मुताबिक यह मामला काफी गंभीर है.

केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना गुमला जैसे आदिवासी बहुल जिले के अधिकतर इलाकों में पहुंच नहीं बना पाई है. इसके कारण लोग खाना बनाने के लिए जंगलों से पेड़ की कटाई करने को मजबूर हैं. गुमला के डुमरी, चैनपुर, बिशुनपुर ऐसे ब्लॉक हैं, जहाँ प्रतिदिन दर्जनों परिवार नियमित रुप से जंगल जाकर लकड़ी काटकर लाते हैं. हालांकि ग्रामीण मानते हैं कि खुशी से नहीं, बल्कि मजबूरी से वे पेड़ों की कटाई करते हैं. अगर उन्हें विकल्प मिल जाए, तो वे पेड़ों की कटाई छोड़ देंगे.

हालांकि इलाके में जंगल की हो रही कटाई को लेकर भाजपा के प्रदेश मंत्री मुनेश्वर साहु काफी चिन्तित हैं. वे कई बार लोगों को समझा चुके हैं, लेकिन ईंधन की जरूरत गांववालों को पेड़ काटने पर मजबूर करती है. बीजेपी नेता भी गांववालों की इस मजबूरी को समझते हैं और कहते हैं कि इसको लेकर वो जिला प्रशासन से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास से बात करेंगे और गांववालों को उज्ज्वला योजना का लाभ दिलाने की कोशिश करेंगे.



जिला के डीएफओ अजीत कुमार सिंह वनों की कटाई को काफी गंभीर मसला मानते हैं और कहते हैं कि  इस तरह के मामले की जानकारी मिलने पर कई बार ग्रामीणों पर कार्रवाई की गयी है.



वन विभाग जंगल की कटाई पर रोक लगाने का लाख दावा करे, लेकिन ग्रामीणों को बिना विकल्प उपलब्ध कराए वनों की कटाई पर पूर्ण रोक संभव नहीं है. ऐसे में सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इन ग्रामीणों को जल्द से जल्द उज्ज्वला योजना का लाभ दे.

 
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