पत्ते से पत्तल बनाकर मोटी कमाई कर रहे हैं यहां के ग्रामीण
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पत्ते से पत्तल बनाकर मोटी कमाई कर रहे हैं यहां के ग्रामीण
पत्ते से पत्तल बनाने का कारोबार

गुमला सदर प्रखंड के अलावा रायडीह, चैनपुर, डुमरी, बिशुनपुर व बसिया के ग्रामीण इलाकों में कई परिवार पत्ते से पत्तल बनाने के कारोबार में जुड़े हुए हैं.

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झारखंड के गुमला में पत्ते से पत्तल बनाने का धंधा गांव-गांव होता है. यहां बने पत्तल की मांग ना केवल ग्रामीण, बल्कि शहरी इलाकों में भी होती है. ग्रामीण इसे बाजारों में भी ले जाकर बेचते हैं. उनकी माने तो यह प्रदूषण नियंत्रण का अच्छा विकल्प है. लिहाजा सरकार को इसे प्रमोट करना चाहिए.

गुमला सदर प्रखंड के अलावा रायडीह, चैनपुर, डुमरी, बिशुनपुर व बसिया के ग्रामीण इलाकों में कई परिवार पत्ते से पत्तल बनाने के कारोबार में जुड़े हुए हैं. पूरा परिवार पत्ते से पत्तल बनाते हैं. गांव के पास जंगल से आसानी से इन्हें पत्ते मिल जाते हैं. एक दिन में एक परिवार करीब तीन सौ पत्तल बना लेते हैं.

गांववालों की माने तो पत्तल पचास पैसे से लेकर एक रुपये प्रति पीस की दर से बिक जाते हैं. खासकर शादी विवाह के मौसम में लोग घर आकर ऑडर देते हैं. जिससे अच्छी कमाई होती है.



पत्ते से पत्तल बनाने के इस परंपरागत धंधे से ना केवल रोजगार मिल रहा है, बल्कि स्वच्छता को भी बढ़ावा मिल रहा है. सामाजिक कार्यकर्ता आलोक रंजन की माने तो आज- कल समारोहों में प्लास्टिक के पत्तल का उपयोग होता है, जो फेंके जाने के बाद प्रदूषण का कारण बनते हैं. अगर मवेशी उसे गलती से खा ले तो उनकी जान चली जाती है. लेकिन पत्ते के पत्तल में खाने से भोजन का स्वाद भी बढ़ता है और उपयोग के बाद फेंके जाने पर यह जानवारों का चारा भी बन जाता है.
आलोक रंजन की माने तो सरकार को इस धंधे से जुड़े लोगों को सहयोग करना चाहिए, जो रोजगार के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में भी काम कर रहे हैं. उधर जंगल में गिरकर बेकार सड़ने से अच्छा पत्तों का खास उपयोग कर रहे हैं.

रिपोर्ट- सुशील कुमार

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