गुमला नगर परिषद की अधूरी हैं तैयारियां, प्रभावित हो सकती है जलापूर्ति
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गुमला नगर परिषद की अधूरी हैं तैयारियां, प्रभावित हो सकती है जलापूर्ति
सरकार के आदेश के बाद पेयजल विभाग ने 15 मार्च से जलापूर्ति रोकने का फैसला किया है.

गुमला जिला के शहरी आबादी के साठ प्रतिशत लोगों को कभी भी जल संकट झेलना पड़ सकता है. पेयजल विभाग ने पंद्रह मार्च के बाद जलापूर्ती बंद करने का अल्टीमेटम दे दिया है.

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झारखंड के गुमला जिला मुख्यालय में शहरी जलापूर्ति योजना कभी भी बाधित हो सकती है. दरअसल पीएचईडी विभाग ने सभी जिलों में नगर निकायी को शहरी जलापूर्ति के संचालन का आदेश जारी किया है. जिसके बाद लगातार पेयजल विभाग नगर परिषद पर इसका जिम्मा लेने का दबाव दे रहा, लेकिन नगर परिषद संसाधन के आभाव में इससे लेने से इंकार कर रहा है. जिसके बाद पेयजल विभाग ने पंद्रह मार्च के बाद जलापूर्ती बंद करने का अल्टीमेटम दे दिया है.

गुमला जिला के शहरी आबादी के साठ प्रतिशत लोगों को कभी भी जल संकट झेलना पड़ सकता है. पेयजल विभाग ने सख्ती दिखाते हुए पंद्रह मार्च तक नगर परिषद को इसके संचालन का जिम्मा लेने का आग्रह किया है. उन्होंने जलापूर्ति से अपने को अलग करने की घोषणा कर दी है.

पेयजल विभाग के अधीक्षण अभियंता पारस नाथ सिंह ने बताया कि राज्य के अधिकांश जिलो में नगर परिषद इसका जिम्मा लेकर संचालन कर रहा है. वहीं सरकार के आदेश के बाद उन्हें इसके संचालन के लिए राशि मिलना भी बंद हो गया है.



इस मामले पर जब नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी रामाशंकर राम का कहना है कि विभाग अभी पेयजल आपूर्ति का जिम्मा लेने की तैयारी कर रहा है. ऐसे तैयारी पूरी नहीं होने तक वे पेयजल आपूर्ति का जिम्मा नहीं ले सकते हैं.



स्थानीय लोगों ने इस मामले में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का आदेश विभाग मानने को तैयार नहीं है. ऐसे में आने वाले दिनों लोगों को पानी का संकट झेलना पड़ा तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.
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