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झारखंडः इस गुफा में राजा ने मनाई थी सुहाग रात, चट्टानों पर दर्ज है प्रेम की दास्तां

News18 Jharkhand
Updated: February 13, 2020, 11:55 AM IST
झारखंडः इस गुफा में राजा ने मनाई थी सुहाग रात, चट्टानों पर दर्ज है प्रेम की दास्तां
हजारीबाग के बड़कागांव स्थित 'इसको गुफा'

पद्मश्री इतिहासकार बुलू इमाम बताते हैं कि इसको गुफा (Isko Cave) का इतिहास काफी पुराना है. इसमें बने रॉक पेंटिंग (Rock Painting) हमारी परंपरा और संस्कृति को दर्शाते हैं. इस गुफा को संरक्षित करने के लिए प्रयास होने चाहिए.

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हजारीबाग. हजार बागों के शहर हजारीबाग में कई ऐतिहासिक धरोहर गुमनामी के अंधेरे में पड़े हुए हैं. बड़कागांव स्थित 'इसको गुफा' (Isko Cave) इन्हीं में से एक है. यह गुफा अपने अंदर इतिहास की कहानियां छुपाए हुए है. लेकिन सरकार के स्तर पर इसको संरक्षित करने के लिए अब तक कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ है. राज्य के इतिहासकार इसको लेकर चिंता जताते हैं. उनका कहना है कि इलाके में कोयला खनन का काम चल रहा है, जिसके लिए विस्फोट किए जाते हैं. इससे इस गुफा को नुकसान पहुंच रहा है. यहां अंकित कोहबर कला (Kohbar Art) नष्ट हो रही है.

5 हजार साल से भी पुराना इतिहास
हजारीबाग जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर बड़कागांव में इसको गुफा स्थित है. इस गुफा के बारे में बताया जाता है कि यह 5 हजार साल से भी अधिक पुराना है. गुफा का इस्तेमाल बादम के राजा किया करते थे. स्थानीय लोगों के मुताबिक जब राजा की शादी हुई, तब इस गुफा के पास उन्होंने रानी के साथ सुहाग रात मनाई थी. यही वजह है कि गुफा के पास के चट्टानों पर आज भी कोहबर कला, जिसे रॉक पेंटिंग कहा जाता है, उकेरे हुए दिखते हैं.

गुफे की दीवार में दर्ज कोहबर कलाएं
गुफे की दीवार में दर्ज कोहबर कलाएं.


पद्मश्री से सम्मानित इतिहासकार बुलू इमाम बताते हैं कि इसको गुफा का इतिहास काफी पुराना है. इसमें बने रॉक पेंटिंग हमारी परंपरा और संस्कृति को दर्शाते हैं. इसलिए इस गुफा के संरक्षण का सार्थक प्रयास होना चाहिए. बुलू इमाम की मानें तो गुफा की चट्टानों पर अंकित कोहबर कला आज भी उपेक्षित है. गुफा के आसपास कोयला खनन के लिए लगातार किए जाने वाले धमाकों से चट्टानों पर असर पड़ता है. इस कारण चट्टानों पर उकेरी गई कोहबर कला भी नष्ट हो रही है.

पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो गुफा
स्थानीय निवासी बुधन महतो कहते हैं कि इस क्षेत्र को अगर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक यहां आएंगे. बुधन महतो ने कहा कि गुफा और आसपास के क्षेत्र के विकास से न सिर्फ पर्यटकों को झारखंड के इतिहास की जानकारी मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा. इसको गुफा जिन पहाड़ियों के बीच स्थित है, वहां का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है. जरूरत है, बस इस क्षेत्र को विकसित करने और नई पहचान दिलाने की. इसके लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन को पहल करनी होगी.रिपोर्ट- राकेश कुमार

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First published: February 13, 2020, 10:45 AM IST
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