हजारीबाग में पैसे के अभाव बौद्धस्थल की खुदाई रूकी, ग्रामीणों में नाराजगी, मिल चुकी हैं 1000 साल पुरानी कई मूर्तियां

खुदाई रूकने से ग्रामीणों में नाराजगी है. (फाइल फोटो)
खुदाई रूकने से ग्रामीणों में नाराजगी है. (फाइल फोटो)

हजारीबाग के बहोरनपुर में 100 मीटर की परिधि में पुरातत्व विभाग (Archeology department) द्वारा इटवा टीला की खुदाई की जा रही थी. करीब 45 दिन खुदाई चली, फिर पैसे के अभाव में इसे बंद कर दिया गया. खुदाई में यहां से बौद्धकालीन कई अवशेष मिले हैं.

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हजारीबाग. जिले के सदर प्रखंड के बहोरनपुर में पुरातत्व विभाग (Archeology Department) पटना के द्वारा खुदाई का काम किया जा रहा था. खुदाई में बौद्ध कालीन अवशेष भी मिले थे. लेकिन पैसे के आवंटन के अभाव में अब खुदाई का काम बंद हो गया है. खुदाई बंद होने से स्थानीय ग्रामीणों में भारी मायूसी है.

दरअसल खुदाई में जिस प्रकार से बौद्ध कालीन मूर्तियां और अवशेष मिल रहे थे, ग्रामीणों को उम्मीद थी कि आगे चलकर यह इलाका पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे. लेकिन ग्रामीण का ये सपना टूट गया है. हालांकि ग्रामीणों को इस बात का भरोसा है कि यहां आने वाले समय में फिर से खुदाई शुरू होगी.

ग्रामीणों ने खुदाई स्थल की देखरेख के लिए पुरातात्विक बचाओ मंच बनाया है. ताकि खुदाई स्थल के साथ कोई छेड़छाड़ ना हो.



स्थानीय बीजेपी विधायक मनीष जयसवाल ने दोबारा खुदाई की मांग करते हुए उम्मीद जताई कि ऐसा होने से आगे यह क्षेत्र बौद्ध सर्किट से जुड़ सकता है.
मिल चुके हैं कई बौद्धकालीन मूर्तियां 

गुरहेत पंचायत के मुखिया मुकेश तिग्गा ने बताया कि इस क्षेत्र में पिछले कई वर्षो से मूर्तियां और पुरानी ईंटें मिले हैं. जिसको देखते हुए पुरातत्व विभाग ने यहां नबंबर-2019 में खुदाई शुरू की. इस क्षेत्र में 45 दिनों में महज 10 प्रतिशत खुदाई की गई. इस दौरान कई अवशेष मिले.

100 मीटर की परिधि में पुरातत्व विभाग द्वारा इटवा टीला में खुदाई की गई है. पिछले 22 नवंबर को विधिवत खुदाई प्रारंभ हुई थी. खुदाई में आधा दर्जन खंडित मूर्तियां, मन्नत स्तूप और भगवान बुद्ध की 60 चित्र अंकित मूर्ति भी प्राप्त हुआ था. इस प्रतिमा में भगवान बुद्ध आसन मुद्रा में बैठे हैं. प्राप्त मूर्तियों को पुरातत्व विभाग ने अपने संरक्षण में ले लिया है.

पुरातत्व विभाग के अनुमान के मुताबिक 1000 साल पहले पाल वंश के शासन काल में भारत में बौद्ध धर्म का काफी विस्तार हुआ था. हजारीबाग का बहोरनपुर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र रहा होगा, जहां पर बुद्ध के अनुयाई तपस्या करने के लिए जंगलों में रहते होंगे.
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