Lockdown के मारे किसानों के लिए 'ई-नाम' बना वरदान, तरबूज बेचकर हो रहे मालामाल

हजारीबाग के किसान ई-नाम पोर्टल की मदद से खेत से ही तरबूज को बेच पा रहे हैं.

हजारीबाग के किसान (Farmer) पहली बार ई-नाम पोर्टल (E-Nam Portal) के माध्यम से तरबूज (Watermelon) की बिक्री कर रहे हैं. चुरचू प्रखंड के चनारो गांव के कई किसान इस पोर्टल के जरिये बिडिंग कर तरबूज को खेत से ही बेच दिया.

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    हजारीबाग. लॉकडाउन (Lockdown) का सबसे ज्यादा असर किसानों (Farmers) पर हुआ है. झारखंड में सब्जी की खेती करने वाले किसानों को उनकी फसलों के लिए बाजार नहीं मिल पा रहा. लिहाजा सब्जियां खेतों में बर्बाद हो रही हैं. लेकिन हजारीबाग के तरबूज उत्पादकों के लिए ऐसे वक्त में ई-नाम पोर्टल (E-Nam Portal) वरदान साबित हो रहा है. भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के इस पोर्टल के सहारे वे अपने तरबूज (Watermelon) को न केवल बेच पा रहे हैं, बल्कि अच्छी कीमत भी पा रहे हैं.

    पहली बार ई-नाम पोर्टल के माध्यम से बेच रहे तरबूज

    हजारीबाग के किसान पहली बार ई-नाम पोर्टल के माध्यम से तरबूज की बिक्री कर रहे हैं. चुरचू प्रखंड के चनारो गांव के कई किसान इस पोर्टल के जरिये बिडिंग कर तरबूज को खेत से ही बेच दिया. कोडरमा, गढ़वा एवं हजारीबाग के व्यापारियों ने इस पोर्टल के माध्यम से इनके उत्पाद को खरीदा. किसान फुलेश्वर महतो ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पोर्टल के माध्यम से तरबूज बेचकर उन्हें अच्छी कमाई हुई है. तरबूज के उचित दाम मिले हैं. साथ ही इन्हें बेचने में परेशानी भी नहीं आई. पहले उत्पादन के बाद तरबूज को बेचने के लिए स्थानीय व्यापारियों पर आधारित रहना पड़ता था.

    24 घंटे में किसानों को मिल जा रहे हैं पैसे  

    हजारीबाग कृषि उत्पादन बाजार समिति के सचिव राकेश कुमार सिंह ने भी बताया कि ई-नाम पोर्टल के कारण जिले के किसानों को तरबूज का उचित मूल्य मिल रहा है. पहले बंगाल और छत्तीसगढ़ के बेहतर क्वालिटी वाले तरबूज के कारण यहां के तरबूजों को उचित कीमत नहीं मिल पाता था. लेकिन ई-नाम पोर्टल के कारण इसबार अच्छे दाम भी मिल रहे हैं. साथ ही किसानों को 24 घंटे में उत्पाद के पैसे भी मिल जा रहे हैं. उन्होंने जिले के दूसरे किसानों से भी ई-नाम पोर्टल में रजिस्ट्रेशन कराकर अपने उत्पाद को घर बैठे बेचने और मुनाफा कमाने की अपील की.

    किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केन्द्र से लेकर राज्य सरकार कई स्तरों पर प्रयासरत हैं. किसानों को कई योजनाओं के साथ-साथ सुविधाएं भी दी जारी रही हैं. बस जरूरत है किसान जागरूक होकर का इनका लाभ लें.

    रिपोर्ट- राकेश कुमार

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