हजारीबाग के मजदूर की गुजरात में मौत, वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार में शामिल हुए घरवाले
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हजारीबाग के मजदूर की गुजरात में मौत, वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार में शामिल हुए घरवाले
परिवारवाले वीडियो कॉल के जरिये अंतिम संस्कार में शामिल हुए

कमल रजक बीते 16 मार्च को गुजरात का कच्छ जिला मजदूरी करने गया था. वहां उसकी तबीयत बिगड़ गई. इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत (Die) हो गई. मृतक को किडनी (Kidney) की परेशानी थी.

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हजारीबाग. लॉकडाउन (Lockdown) में गुजरात में फंसे इचाक प्रखंड निवासी कमल रजक की शुक्रवार को मौत हो गई. दोस्तों ने वहीं उसका अंतिम संस्कार (Funeral) कर दिया. इस दौरान परिवारवाले वीडियो कॉल (Video Call) पर अंतिम संस्कार में शामिल हुए. लॉकडाउन और पैसे के अभाव के कारण साथी डेड बॉडी को गांव नहीं भेज पाए. कच्छ जिले के गांधीधाम में कमल रजक का अंतिम संस्कार किया गया.

किडनी की परेशानी से जूझ रहा था मृतक 

कमल रजक बीते 16 मार्च को गुजरात का कच्छ जिला मजदूरी करने गया था. वहां उसकी तबीयत बिगड़ गई. गांव के साथियों ने गांधीधाम स्थित एक अस्पताल में उसे भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत हो गई. मृतक को किडनी की परेशानी थी. कमल की मौत की सूचना दोस्तों ने परिवारवालों को दी. लेकिन लॉकडाउन और पैसे की तंगी के कारण डेड बॉडी वहां से भेजना संभव नहीं था. इसलिए घरवालों की रजामंदी पर दोस्तों ने मिलकर उसका वहीं अंतिम संस्कार कर दिया. इस दौरान परिवारवाले गांव से वीडियो कॉल के जरिये अंतिम संस्कार को देखा.



बेटे को पिता को अग्नि नहीं दे पाने का मलाल
मृतक कमल रजक घर का एकलौता कमाने वाला था. उसके बाद परिवार में एक पत्नी और दो बच्चे हैं. अब कमल की मौत के बाद इनलोगों का गुजारा कैसे होगा, इस सवाल से गांववाले परेशान हैं. पत्नी का कहना है कि भले ही वीडियो कॉल से वे लोग अंतिम संस्कार में शामिल हो गये, लेकिन बेटे को पिता को कंधा देना का मौका नहीं मिला. वह पिता को अग्नि नहीं दे पाया. हिंदू धर्म में पिता को अग्नि देने का अधिकार पुत्र को ही होता है.

रिपोर्ट- राकेश कुमार

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