केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा: फंड मैनेजर से सियासी सिकंदर, ऐसा रहा है सफर

सियासत में आने से पहले जयंत सिन्हा 25 साल तक फंड मैनेजर के रूप में फिलाडेल्फिया और अमेरिका के बोस्टन और दिल्ली में काम किया.

News18 Jharkhand
Updated: May 15, 2019, 7:13 PM IST
केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा: फंड मैनेजर से सियासी सिकंदर, ऐसा रहा है सफर
केन्द्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा
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Updated: May 15, 2019, 7:13 PM IST
केन्द्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा की सियासी किस्मत को हजारीबाग की जनता ने 6 मई को हुए मतदान में ईवीएम में बंद कर दिया. 23 मई को जनता का फैसला सामने आ जाएगा. हजारीबाग सीट पर उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस के गोपाल साहू से रहा. जयंत सिन्हा लगातार दूसरी बार हजारीबाग सीट से लोकसभा चुनाव लड़े रहे हैं. इससे पहले 2014 में वह यहां से जीत कर पहली बार संसद पहुंचे. 2014 में पिता यशवंत सिन्हा ने उनके लिए यह सीट छोड़ दी.

पहले वित्त, फिर बने नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री



साल 2014 में केन्द्र में मोदी सरकार बनने के बाद पहले जयंत सिन्हा को वित्त राज्य मंत्री बनाया गया. फिर 2016 में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई. वर्तमान में वह इसी पद पर हैं. उनके पिता यशवंत सिन्हा, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार (1998-2002) में वित्त मंत्री थे, तब जयंत ने बंधक ब्याज कर कटौती और आईटी रिटर्न भरने के लिये सरल फॉर्म और कर अनुपालन में सुधार करने जैसी कई नई पहलों पर नीतिगत जानकारी उन्हें प्रदान की थी. वर्ष 2000 और 2005 में मैकिन्से-नैसकॉम की उद्योग रिपोर्ट लिखने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वह प्रमुख लेखकों में से एक थे.

नेता बनने से पहले थे फंड मैनेजर

सियासत में आने से पहले जयंत सिन्हा 25 साल तक फंड मैनेजर के रूप में फिलाडेल्फिया और अमेरिका के बोस्टन और दिल्ली में काम किया. सिन्हा ने डेली हंट, डी लाइट, आईमेरिट और जनग्राह सहित कई कंपनियों और संगठनों में बोर्ड के सदस्य के रूप में काम किया. उन्हें अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम, वाशिंगटन डीसी के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में सेवा करने के लिए भी आमंत्रित किया गया था.

आईआईटी दिल्ली से किया ग्रेजुएशन

जयंत सिन्हा का जन्म 21 अप्रैल 1963 को झारखंड के गिरिडीह में हुआ था. सियासत में आने से पहले उनके पिता यशवंत सिन्हा आईएएस अधिकारी थे. पिता के तबादले के कारण उन्हें बचपन में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना पड़ा. उन्होंने स्कूली शिक्षा पटना के सेंट माइकल स्कूल और दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल से पूरी की. पहली कोशिश में ही जेईई पास करने के बाद 1980 में आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया.हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए

आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएशन करने के बाद जयंत ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया से अपना एमएस इनर्जी मैनेजमेंट एंड पॉलिसी पूरा किया. उऩ्होंने दुनिया के प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में से एक, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से 1992 में एमबीए की डिग्री हासिल की. आईआईटी के दिनों में ही उनकी मुलाकात पुनिता से हुई और दोनों 1986 में शादी के बंधन में बंध गये. इनकी चार संतानें हैं.

चुनावी अभियानों में पिता की मदद की

राजनीति से जयंत सिन्हा का सीधा परिचय वर्ष 1998 में हुआ. उस समय उन्होंने चुनावी अभियानों में पिता की सक्रिय रूप से सहायता की थी. उन्होंने गांव की सड़कों के निर्माण, पेयजल की गुणवत्ता में सुधार, सौर लालटेन का वितरण, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने सहित कई अन्य योजनाओं को पूरा कराने में जिम्मेदारी निभाई थी.

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