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न कीट, न कीड़े, महिलाओं के हौसले से लहलहा रही बंपर फसल

न कीट, न कीड़े, महिलाओं के हौसले से लहलहा रही बंपर फसल

सूबे के अति पिछड़ा जिला में शुमार चतरा के एक गांव की महिलाएं अपने हौसलों के रंगों के साथ गांव की तस्वीर बदलने की कवायद में जुटी हैं. सदर प्रखंड के देवरिया गांव में ही महिलाओं ने रसायनिक खाद को अलविदा कहकर जैविक खाद का प्रयोग करना शुरू किया है.

सूबे के अति पिछड़ा जिला में शुमार चतरा के एक गांव की महिलाएं अपने हौसलों के रंगों के साथ गांव की तस्वीर बदलने की कवायद में जुटी हैं. सदर प्रखंड के देवरिया गांव में ही महिलाओं ने रसायनिक खाद को अलविदा कहकर जैविक खाद का प्रयोग करना शुरू किया है.

सूबे के अति पिछड़ा जिला में शुमार चतरा के एक गांव की महिलाएं अपने हौसलों के रंगों के साथ गांव की तस्वीर बदलने की कवायद में जुटी हैं. सदर प्रखंड के देवरिया गांव में ही महिलाओं ने रसायनिक खाद को अलविदा कहकर जैविक खाद का प्रयोग करना शुरू किया है.

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    सूबे के अति पिछड़ा जिला में शुमार चतरा के एक गांव की महिलाएं अपने हौसलों के रंगों के साथ गांव की तस्वीर बदलने की कवायद में जुटी हैं. सदर प्रखंड के देवरिया गांव में ही महिलाओं ने रसायनिक खाद को अलविदा कहकर जैविक खाद का प्रयोग करना शुरू किया है. इतना ही नहीं महिलाएं समूह बनाकर दूसरे गांव में भी यह अभियान चला रही हैं.

    एक ही गांव में 156 वर्मी कम्पोस्ट बेड

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    सदर प्रखंड के देवरिया गांव की महिलाओं ने अपने प्रयास से ही वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया है और अब अपने ही उत्पाद का खेतों में प्रयोग कर रही हैं. इन महिलाओं ने अपने-अपने घरों में जैविक खाद का उत्पादन करना शुरु किया है और यह अभियान दूसरे गांवों तक पहुंचा रही है. दरअसल आज से तकरीबन तीन महीने पहले नाबार्ड के सहयोग से गांव में वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन के लिए कैंप लगाया गया था. उसके बाद महिलाओं ने अपनी ही लागत से वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन करने की ठान ली और एक ही गांव में 156 वर्मी कम्पोस्ट बेड बना लिए. देवरिया गांव की प्रीति देवी ने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट से फसल काफी अच्छा होती है और फसल में कीट भी नहीं लगता है. जबकि मुनिया देवी ने कहा कि गांव की महिलाओं ने केंचूआ खाद का बकायदा प्रशिक्षण लिया और उसके बाद आज घर-घर में केंचूआ खाद का उत्पादन होने लगा. देवरिया गांव के बुजुर्ग भूपेन्द्र मिश्रा ने बताया कि महिलाओं के प्रयास से गांव की तकदीर बदल रही है और इस काम में महिलाओं ने काफी सराहनीय प्रयास किया है. उन्होंने बताया कि केंचूआ खाद से फसल के उत्पादन में वृद्धि हुई है. वहीं कृषि पदाधिकारी अशोक सिन्हा ने कहा है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो केंचूआ खाद का व्यवसायिक उत्पादन शुरु हो किया जाएगा.

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    वीडियो देख कर हुईं उत्साहित

    समाजिक कार्यकर्ता उदय सिंह ने बताया कि सबसे पहले महिलाओं का समूह बनाया गया. उसके बाद वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन का वीडियो क्लिप उन्हें दिखाया गया.इसके बाद महिलाएं इसके लिए उत्साहित हुईं तो महिलाओं को वर्मी कम्पोस्ट का प्रशिक्षण दिया गया. महिलाओं ने अपने ही दम पर वर्मी कम्पोस्ट का बेड तैयार किया और शुरु हो गया केंचुआ खाद का उत्पादन.

    (चतरा से संतोष कुमार की रिपोर्ट)

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