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Lok Sabha Election 2019: झारखंड के 'शिमला' में क्या जयंत सिन्हा खिला पाएंगे कमल?

क्या 7वीं बार हजारीबाग में खिलेगा कमल?
क्या 7वीं बार हजारीबाग में खिलेगा कमल?

हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र हजारीबाग और रामगढ़ जिले के 5 विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया है. यहां 16 बार हुए चुनाव में बीजेपी- कांग्रेस को 6- 6 बार सफलता मिली है.

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घने जंगल, खूबसूरत वादियां, कलकल बहती नदियां, जंगल और पठार से घिरे हजारीबाग की खूबसूरती देखते ही बनती है. प्रकृति ने इसे जितना खूबसूरत बनाया है उतना ही इसकी गोद में खजाने को भी भरा है. यहां की रत्नगर्भा धरती में कई अयस्क और खनिज भरे पड़े हैं. आबोहवा और मौसम ऐसा कि स्वास्थ्य लाभ के लिए यहां लोग आते हैं. वन, झील और पहाड़ियां इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं. हजारीबाग को 1832 में जिला का दर्जा मिला. प्राचीन समय से ही हजारीबाग प्रशासनिक गतिविधियों का केन्द्र रहा. इस इलाके का इतिहास काफी समृद्ध रहा है. आजादी की लड़ाई से लेकर आजादी के बाद की भारत की राजनीति में भी इस क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों का दखल रहा है.

राजा राममोहन राय और विनोबा भावे की कर्मभूमि रहा है हजारीबाग 

हजारीबाग की खूबसूरत वादियों में राजा राममोहन राय ने समाज सुधार का ताना-बाना बूना. यहां विनोबा भावे का भूदान आंदोलन सफल रहा. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों ने हजारीबाग जेल के रूप में एक अभेद किला तैयार किया था. जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में क्रांतिकारी ना सिर्फ हजारीबाग जेल की ऊंची दीवार फांद कर फरार हो गये बल्कि अंग्रेजों के उस भ्रम को भी तोड़ दिया, जो हजारीबाग जेल के रूप में था. इस जेल से कई सामाजिक और राजनीतिक लड़ाइयां लड़ी गईं.



देश में जिसकी हवा बही, उसकी यहां जीत हुई
हजारीबाग की सामाजिक संरचना विविधतापूर्ण है. यहां कुर्मी जाति की जनसंख्या सबसे ज्यादा है. अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के साथ पिछड़ी जाति के लोग भी यहां निवास करते हैं. वहीं राजपूत और कायस्थ जाति के लोगों की संख्या शहरी क्षेत्र में ज्यादा है. कहा जाता है कि यहां की राजनीति में जातीय नहीं, सामाजिक समीकरण हावी रहता है. काफी हद तक देश में जिस पार्टी की हवा रही, ज्यादातर मौकों पर हजारीबाग में उसी की ही जीत हुई है. हजारीबाग लोगसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास को देखें, तो हाल के दिनों में यहां बीजेपी को ज्यादा सफलता मिली. अबतक यहां 16 बार हुए चुनाव में बीजेपी को 6 बार और कांग्रेस को 6 बार सफलता मिली.

नक्सलवाद और कोयला तस्करी यहां के मुख्य मुद्दे

हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र हजारीबाग और रामगढ़ जिले के 5 विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया है. इसमें हजारीबाग, बरही, रामगढ़, मांडू और बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. 2014 में यहां से बीजेपी के जयंत सिन्हा जीते थे. जयंत सिन्हा को 4,06,931 वोट मिले थे. दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस उम्मीदवार सौरभ नारायण सिंह को 2,47,803 और तीसरे स्थान पर आजसू उम्मीदवार लोकनाथ महतो को 1,56,186 मत मिले थे. एक बार फिर लोकसभा चुनाव को लेकर हजारीबाग में सरगर्मी तेज है. एनडीए और महागठबंधन के नेता जोर लगा रहे हैं. नक्सलवाद और कोयला तस्करी यहां के मुख्य मुद्दे हैं. हालांकि हाल के दिनों में नक्सलवाद पर काफी हद तक रोक लगी है.

मौजूदा सांसद के कामकाज पर मिलीजुली राय

हजारीबाग के लोगों के आय का मुख्य साधन कोयला खनन है. यहां सीसीएल की कई खदाने चलती हैं. खनन वाले इलाके में विस्थापन एक बड़ी समस्या है. ज्यादातर लोगों की शिकायत है कि उन्हें सालों से मुआवजा नहीं मिला है. घने जंगल और खनन वाले इलाकों में नक्सलियों का असर दिखता है. अवैध खनन और कोयला तस्करी से नक्सलियों की अर्थव्यवस्था चलती है. हालांकि हाल के दिनों में इसपर काफी हद तक रोक लगी है. खदानों में काम करने वाले मजदूरों की शिकायत है कि जनप्रतिनिधि उनकी सुनते नहीं. ग्रामीण इलाकों के लोगों का कहना है कि गरीबी मिटाने को लेकर कोई काम यहां नज़र नहीं आता. गरीब ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुधरे इसके लिए यहां काम होना चाहिए था, लेकिन नहीं हुआ. मौजूदा सांसद ने कभी गरीबों की सुध नहीं ली. शहरी क्षेत्र के लोगों की शिकायत बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था, जाम और अतिक्रमण को लेकर है. लोगों का कहना है कि शहर में गाड़ियों के पार्किंग की भी कोई व्यवस्था नहीं है. लेकिन युवा वोटर्स सांसद और केन्द्र सरकार के काम से संतुष्ट नजर आए. हजारीबाग में मेडिकल कॉलेज खोले जाने के फैसले का युवाओं ने स्वागत किया. साथ ही सरकार से आगे इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की भी मांग की.

जयंत सिन्हा ने शानदार काम किया- बीजेपी

हजारीबाग सीट पर बीजेपी की जीत होती रही है. मौजूदा सांसद जयंत सिन्हा के पिता यशवंत सिन्हा यहां से तीन बार लोकसभा का चुनाव जीते. हालांकि अब यशवंत सिन्हा बीजेपी छोड़ चुके हैं. ऐसे में बीजेपी के सामने चुनौती है. जयंत सिन्हा 2014 में पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए. वह मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन राज्य मन्त्री हैं. इससे पहले वित्त राज्य मंत्री थे. संसद में इनकी उपस्थिति का औसत 97 प्रतिशत रहा. संसद में अपने कार्यकाल के दौरान इन्होंने मात्र 9 प्रश्न पूछे और 2 डिबेट्स में हिस्सा लिया. एक भी प्राइवेट मेम्बर बिल प्रस्तुत नहीं किया. सांसद निधि की 105 फीसदी राशि खर्च की. बीजेपी का दावा है कि सांसद जयंत सिन्हा ने हजारीबाग में शानदार काम किया है. समाज के हर तबके के विकास पर ध्यान दिया है. हजारीबाग में कई विश्वस्तरीय प्रोजेक्ट की शुरुआत की है.

मौजूदा सांसद के कामों का ये है लेखा-जोखा 

बीजेपी का कहना है कि जयंत सिन्हा ने अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षा, कृषि, सड़क के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है. क्षेत्र को मेडिकल कॉलेज मिला. नगवा में एयरपोर्ट का निर्माण हो रहा है. हजारीबाग-बड़कागांव सड़क का निर्माण जारी है. हजारीबाग से लंबी दूरी की ट्रेन सेवा की शुरूआत हुई. गोरिया कर्मा में भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र का निर्माण हो रहा है. हजारीबाग-रामगढ़ ग्रामीण पाइपलाइन जलापूर्ति योजना की शुरुआत हुई. रामगढ़ में राज्य का पहला महिला इंजीनियरिंग कॉलेज बना.

बीजेपी के दावों पर विपक्ष का इनकार

महागठबंधन के घटक दल बीजेपी के इन दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं. कांग्रेस का कहना है कि विकास एक प्रक्रिया के तहत हुआ. इसमें सांसद का कोई योगदान नहीं है. वहीं सीपीआई का कहना है कि सांसद आधे-अधूरे योजनाओं का उद्घाटन कर विकास का श्रेय ले रहे हैं. जनता के बीच सांसद के कामकाज को लेकर मिलीजुली राय है. कुछ लोग जयंत सिन्हा के कार्यकाल के बेहतर बता रहे हैं, तो कुछ लोग क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं. हजारीबाग में पांचवें चरण में 6 मई को वोट डाले जाएंगे और 23 मई को नतीजे आएंगे. उस दिन पता चलेगा कि जनता ने किसके दावों पर भरोसा किया.

रिपोर्ट- मनोज कुमार

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