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सालों पहले ग्लेशियर से ढका था हजारीबाग, इस नदी में मिले प्रमाण

News18 Jharkhand
Updated: January 16, 2019, 1:00 PM IST
सालों पहले ग्लेशियर से ढका था हजारीबाग, इस नदी में मिले प्रमाण
हजारीबाग में हिमखंड के प्रमाण

भूगर्भ वैज्ञानिक देवाशीष प्रताप सिंह की माने तो यहां सालों पहले ग्लेशियर हुआ करता था, जो किसी कारण से पिघलने लगा. उस दौरान आस-पास के चट्टानों को वह अपने साथ लेकर यहां जमा कर दिया.

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झारखंड के हजारीबाग में तीन सौ मिलियन वर्ष पहले मौजूद हिमखंड के प्रमाण मिले हैं. इसको लेकर भूगर्भ शास्त्रियों में खासा उत्साह है. उनके मुताबिक चरही स्थित दूधी नदी में पाये जाने वाले चट्टान और कंक्रीट इसके पुख्ता प्रमाण हैं. यहां देश-विदेश के लोग इस पर शोध करने आते रहते हैं.

भूगर्भ वैज्ञानिक देवाशीष प्रताप सिंह की माने तो यहां सालों पहले ग्लेशियर हुआ करता था, जो किसी कारण से पिघलने लगा. उस दौरान आस-पास के चट्टानों को वह अपने साथ लेकर यहां जमा कर दिया. आज वही चट्टान मौजूद हैं, जिनमें ग्लेशियर होने के प्रमाण हैं. बतौर वैज्ञानिक यहां समुद्र होने के साथ-साथ कई नदियों के भी प्रमाण मिले हैं.

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के भूगर्भ शास्त्री एचएन सिन्हा कहते हैं कि इन चट्टानों पर कई शोध हो चुके हैं. यहां देश-विदेश के भूगर्भ शास्त्री शोध करने आते रहते हैं. उनके मुताबिक 2020 में भारत में इंटरनेशनल जियोलॉजिकल कांग्रेस का आयोजन होने वाल है. उस दौरान विदेश भूगर्भ शास्त्री यहां साइट विजिट के लिए आएंगे.

फिलहाल सरकार के द्वारा दूधी नदी पर निर्माणकार्य कराया जा रहा है. भूगर्भ शास्त्रियों का कहना है कि इससे हिमखंड के महत्वपूर्ण प्रमाण नष्ट हो जाएंगे. जबकि इन्हें संरक्षित करने की जरूरत है. बतौर वैज्ञानिक दूधी नदी के एक किलोमीटर का दायरा भूगर्भ विज्ञान के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि धरती पर ऐसे कम ही जगह हैं, जहां एक साथ समुद्र, नदी और हिमखंड के प्रमाण हैं.

रिपोर्ट- राकेश कुमार 

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First published: January 16, 2019, 1:00 PM IST
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