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Hazaribagh: मार्केट में आ गए तरह-तरह के तिलकुट, जानें इसे बनाने का प्रोसेस और इसकी कीमत

Tikulat Market in Hazaribagh: जैन तिलकुट भंडार के मालिक आनंद जैन कहते हैं कि पूरे देश में बिहार के गया का तिलकुट फेमस ह ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट : सुबोध कुमार गुप्ता

    हजारीबाग. मकर संक्रांति में एक महीने से ज्यादा समय बाकी है. लेकिन हजारीबाग में तिलकुट बनाने और बेचने का सिलसिला शुरू हो चुका है. लोगों ने अभी से तिलकुट का स्वाद लेना शुरू कर दिया है. इन दिनों हजारीबाग के 200 से अधिक कारखानों में तिलकुट बनाने का काम चल रहा है. यहां के तिलकुट की सप्लाई झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल व दिल्ली में भी होती है. कानपुर के तिल व हजारीबाग के बड़कागांव के गुड़ से यहां तिलकुट तैयार हो रहे हैं. इसके अलावा चीनी व खोवावाले तिलकुट भी बनाए जा रहे हैं.

    हजारीबाग के जैन तिलकुट भंडार के कारीगर मोती राम ने बताया कि तिलकुट बनाने की विधि जानने के बाद इसे खाने का स्वाद दुगुना हो जाएगा. कानपुर से खास तौर पर मंगाए तिल को करीब 40 मिनट तक कढ़ाही में भुना जाता है. भुने हुए तिल को गुड़ या चीनी के पाग में मिलाते हैं. इस दौरान स्वाद व सुगंध के लिए सौंफ और इलायची मिला सकते हैं. उसके बाद इसे कूटते हुए तिलकुट का आकार देते हैं. एक तिलकुट करीब 18 से 20 बार कूटा जाता हैं. उन्होंने बताया कि दुकान पर रोजाना 3 क्विंटल तिलकुट तैयार किया जा रहा है.

    हजारीबाग में 200 तिलकुट कारखाना

    जैन तिलकुट भंडार के मालिक आनंद जैन कहते हैं कि पूरे देश में बिहार के गया का तिलकुट फेमस है. लेकिन पिछले 10 वर्षों से हजारीबाग का तिलकुट पश्चिम बंगाल और दिल्ली तक निर्यात किया जा रहा है. हजारीबाग में 200 से अधिक तिलकुट बनाने के कारखाने हैं. गया के बाद सबसे ज्यादा हजारीबाग के बने तिलकुट की बिक्री हो रही है. हजारीबाग से रोजाना 10 क्विंटल तिलकुट पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है.

    जानें तिलकुट की कीमत

    आनंद जैन ने बताया कि इस बार चीनी तिलकुट 220 रुपये किलो बिक रहा है, वहीं, गुड़ तिलकुट 240 रुपये प्रति किलो, खोवा तिलकुट 400 रुपये प्रति किलो, मुड़ी तिलकुट 300 रुपये प्रति किलो व बादाम मिस्टी तिलकुट 500 रुपये प्रति किलो है. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा चीनी तिलकुट व गुड़ तिलकुट की मांग हो रही है.

    चतरा के कारीगर

    तिलकुट कारीगर मोती राम ने बताया कि वह चतरा के रहनेवाले हैं. तिलकुट बनाने के लिए चतरा के कारीगर की मांग झारखंड के साथ बिहार व पश्चिम बंगाल में भी रहती है. इस सीजन में करीब 2000 कारीगर अलग-अलग जगहों पर तिलकुट बनाने में जुटते हैं. मोती राम ने बताया कि उन्हें रोजाना 700 रुपये मजदूरी मिलती है. दो महीने तक यह काम चलता है. उसके बाद फिर से अपने काम पर लौट जाते हैं.

    Tags: Hazaribagh news, Jharkhand news, Makar Sankranti

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