कोरोना के बीच होली का रंग फीका ना पड़ जाए, इसलिए ऑर्गेनिक गुलाल बना रहीं ग्रामीण महिलाएं

होली पर ऑर्गेनिक गुलाल की मांग काफी बढ़ जाती है.

होली पर ऑर्गेनिक गुलाल की मांग काफी बढ़ जाती है.

Hazaribagh News: दारू ग्रामीण सेवा केन्द्र की महिलाएं अरारोट, खाने वाले रंग, एसेंस और गुलाब जल का उपयोग कर ऑर्गेनिक गुलाल बनाती हैं, जो शरीर पर लगाने से हानिकारक प्रभाव नहीं छोड़ता है.

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रिपोर्ट- राकेश कुमार

हजारीबाग. वैसे तो इस बार कोरोना को लेकर होली (Holi) का रंग फीका रहने वाला है. राज्य सरकार ने भी लोगों को कोरोना गाइडलाइन (Corona Guideline) का पालन करते हुए घर के अंदर ही होली मनाने की अपील की है. लेकिन बंदिशों के बावजूद होली का पर्व उदास ना जाए, इसलिए हजारीबाग जिले के दारू प्रखंड में ग्रामीण सेवा केंद्र की महिलाएं ऑर्गेनिक गुलाल बनाने में जुटी हुई हैं.

दारू ग्रामीण सेवा केन्द्र की महिलाएं अरारोट, खाने वाले रंग, एसेंस और गुलाब जल का उपयोग कर ऑर्गेनिक गुलाल बनाती हैं, जो शरीर पर लगाने से हानिकारक प्रभाव नहीं छोड़ता है. दूसरी ओर इन महिलाओं को कमाई भी ठीक-ठाक हो जाती है.

संस्था की अध्यक्ष राखी कुमारी का कहना है कि इस ऑर्गेनिक गुलाल से लोगों को कोई परेशानी नहीं होती है, क्योंकि इसमें कोई रासायनिक पदार्थ नहीं मिलाया जाता है. अगर यह गुलाल आंखों में भी चला जाता है तो भी कोई हानि नहीं होती है.
राखी के मुताबिक फूड कलर, अरारोट और एसेंस आयल मिलाकर यह बनाया जाता है. इससे लोगों को होली पर गुलाल खेलने में कोई परेशानी नहीं है. आर्गेनिक गुलाल की बाजार में काफी मांग है. अब तक वो दो लॉट माल बनाकर बेच चुकी है. एक और बड़ा लॉट तैयार कर रही है.

संस्था की सदस्य आशा देवी का कहना है कि ऑर्गेनिक गुलाल बनाकर उन्हें अच्छी कमाई हो रही है. होली पर बाजार भी में इसकी डिमांड काफी बढ़ जाती है. गुलाल को बेचने में कोई परेशानी नहीं आती.

ऑर्गेनिक गुलाल लोगों की सेहत के साथ-साथ ग्रामीण सेवा केंद्र से जुड़ी महिलाओं के आर्थिक सेहत पर अच्छे परिणाम देती है. इन महिलाओं द्वारा अपने बल स्वयं को खड़ा करने की कोशिश अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा साबित हो सकती है.
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