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झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: बहरागोड़ा में दल-बदल के बीच बीजेपी-जेएमएम में सीधा मुकाबला

News18 Jharkhand
Updated: November 26, 2019, 1:12 PM IST
झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: बहरागोड़ा में दल-बदल के बीच बीजेपी-जेएमएम में सीधा मुकाबला
बहरागोड़ा सीट पर बीजेपी के कुणाल षाडंगी और जेएमएम के समीर मोहंती के बीच सीधा मुकाबला है.

कुणाल षाडंगी (Kunal Sarangi) का कहना है कि जेएमएम नेता के तौर पर भी उन्होंने प्रधानमंत्री (PM Modi) के अच्छे कामों का उल्लेख किया. लेकिन पार्टी ने इसका महत्व नहीं समझा. इसलिए उन्होंने जेएमएम (JMM) छोड़ दी.

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जमशेदपुर. बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र (Behragowda Assembly Constituency) में इस बार चुनावी राजनीति पलटी हुई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सीटिंग विधायक कुणाल षाडंगी (Kunal Sarangi) इस बार बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं. चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया. वहीं पिछले बार यहां पर बीजेपी के उम्मीदवार रहे समीर मोहंती (Sameer Mohanty) जेएमएम में शामिल होकर चुनावी दांव आजमा रहे हैं.

कुणाल षाडंगी पिछले विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के टिकट पर जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे. तब उनकी उम्र मात्र 29 साल थी. लेकिन जैसे ही 5 साल पूरे हुए, कुणाल ने पाला बदल लिया. उन्होंने अपनी आस्था बीजेपी की तरफ दिखाई और बीजेपी ने भी कुणाल को हाथों-हाथ ले लिया. और विधानसभा चुनाव के लिए सिंबल थमा दिया. कल तक बीजेपी पर सवाल उठाने वाले कुणाल अब उसकी योजनाओं का गुणगान अपने प्रचार में कर रहे हैं.

कुणाल षाडंगी का कहना है कि जेएमएम नेता के तौर पर भी उन्होंने प्रधानमंत्री के अच्छे कामों का उल्लेख किया. लेकिन पार्टी ने इसका महत्व नहीं समझा. इसलिए उन्होंने जेएमएम छोड़ दी.

कुणाल षाडंगी को विरासत में मिली सियासत

कुणाल षाडंगी को राजनीति विरासत में मिली. उनके पिता दिनेश षाडंगी बीजेपी के कद्दावर नेता रहे हैं. बहड़ागोड़ा से विधायक और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी बदला लेते हुए बीजेपी के ही समीर मोहंती को तोड़ लिया और टिकट देकर बहरागोड़ा के मुकाबले को दिलचस्प बनाया दिया है. समीर कुमार मोहंती 2014 के विधानसभा चुनाव में कुणाल षाडंगी से चुनाव हारे थे.

कानून पचड़े में जेएमएम प्रत्याशी

हालांकि समीर कुमार मोहंती एक कानूनी पचड़े में पड़कर अंडरग्राउंड हो गये हैं. उनकी पत्नी नैना मोहंती चुनाव प्रचार का पूरा जिम्मा उठा रही हैं. नैना का आरोप है कि उनके पति को केस में फंसाकर चुनाव के समय जेल भेज दिया जाता है. सरकार उनके साथ ज्यादती कर रही है. हालांकि समीर मोहंती के समर्थक आर प्रधान का दावा है कि हर हाल में बहरागोड़ा सीट जेएमएम के पास ही रहेगी.
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क्षेत्र में बड़े अस्पताल की कमी

बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 20 हजार 938 वोटर्स है. 14 उम्मीदवार चुनावी मुकाबले में हैं. बहरागोड़ा में पिछले पांच साल में सड़कें बनी हैं. पेयजल की कोई समस्या नहीं है. बिजली की आपूर्ति भी ठीक है. लेकिन शिक्षण संस्थानों की कमी है. इससे छात्रों को 9 से 10 किलोमीटर दूर स्कूल-कॉलेज जाना होता है. बड़े अस्पताल की भी इस क्षेत्र में कमी है. इलाज के लिए लोगों जमशेदपुर जाना होता है.

बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र बंगाल और ओडिशा बॉर्डर से सटा हुआ है. जंगली इलाके से घिरे होने के कारण यहां के लोगों को हाथियों से काफी परेशानी होती है. हाथी लोगों को जान और माल का नुकसान पहुचाते हैं. यहां के किसानों को उनसे जुड़ी सरकारी योजनाओं की भी जानकारी नहीं है. ज्यादातर किसानों को किसान समृद्धि योजना या जन-धन योजना का लाभ नहीं मिल पाया है.

7 दिसंबर को वोटिंग 

बेशक सीटिंग विधायक कुणाल षाडंगी नये चुनाव चिह्न पर ताल ठोक रहे हों. लेकिन जेएमएम प्रत्याशी उनके कामों को खुलकर नकार भी नहीं पा रहे हैं. चूंकि कुणाल पांच साल तक जेएमएम विधायक के तौर पर क्षेत्र में काम किया. दूसरे चरण में 7 दिसंबर को बहरागोड़ा में वोट डाले जाएंगे. उस दिन जनता अपना फैसला ईवीएम में बंद कर देगी.

(रिपोर्ट- बृजम पांडेय)

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First published: November 26, 2019, 1:11 PM IST
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