झारखंड में नियोजन नीति वापस लेने पर सियासी घमासान, बीजेपी ने हेमंत सरकार से पूछे ये 7 सवाल

हेमंत सरकार ने पिछली बीजेपी सरकार की नियोजन नीति वापस ले ली है. (फाइल फोटो)

हेमंत सरकार ने पिछली बीजेपी सरकार की नियोजन नीति वापस ले ली है. (फाइल फोटो)

भाजपा (BJP) के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि बगैर नई नियोजन नीति लागू किये जल्दबाजी में लाखों योग्य प्रतिभागी युवाओं को रोजगार से वंचित करना गंभीर अपराध है.

  • Share this:
जमशेदपुर. झारखंड की हेमंत सरकार (Hemant Government) ने पिछली रघुवर सरकार की नियोजन नीति वापस ले ली है. इससे बीजेपी (BJP) सरकार पर हमलावर हो गई है. बीजेपी ने नियोजन नीति वापस लेने सहित जेपीएससी परीक्षा से जुड़े कई संशोधनों पर हेमंत सरकार पर गंभीर सवाल उठाये हैं. पार्टी का कहना है कि लगातार अपने अपरिपक्व फैसलों के लिए कुख्यात झारखंड की वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार ने एक और कारनामा किया है.

बता दें कि बीते मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में हेमंत सरकार ने वर्ष 2016 और 2018 की संशोधित नियोजन नीति को रद्द करने का निर्णय लिया. बीजेपी ने इस फैसले को अप्रासंगिक करार देते विरोध जताया है. और सरकार से सात सवाल पूछे हैं.

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने सरकार के निर्णयों को बेतुका करार देते हुए तीव्र आलोचना की. उन्होंने कहा कि बगैर नई नियोजन नीति लागू किये जल्दबाजी में लाखों योग्य प्रतिभागी युवाओं को रोजगार से वंचित करना गंभीर अपराध है. उन्होंने उन सफल प्रतिभागियों के प्रति भी गहरी चिंता जाहिर की है जो नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं.

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कड़ी मेहनत के बूते परीक्षा पास करना और नियुक्ति पत्र मिलने की जगह विज्ञापन रद्द करने की खबर मिलना छात्रों के लिए अत्यंत पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार को अपने निर्णय की समीक्षा कर उसे अविलंब वापस लेना चाहिए. बीजेपी ने इस बाबत सरकार से सात सवाल पूछे हैं.
हेमंत सरकार से बीजेपी के 7 सवाल



  • 1. सोनी कुमार के मामले में आठ फ़रवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। राज्य सरकार ने एसएलपी दायर की है उसके पहले इस निर्णय के लिए इतनी हड़बड़ाहट क्यों?




  • 2. नियोजन नीति ग़लत थी तो राज्य सरकार ने उसे हाइकोर्ट में डिफेंड क्यों किया? फिर हाइकोर्ट में हारने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज क्यों किया?


  • 3. पहले कोर्ट से बिना स्टे ऑर्डर लिए नौ महीनों तक बहाली रोक की जाती है और साल भर के बाद ख़त्म कर दी जाती है ये कैसा निर्णय है?


  • 4. 11-13 ज़िलों के इतिहास, संस्कृत तथा संगीत के शिक्षक , PRT शिक्षक, पंचायत सचिव अभ्यर्थी, रेडियो ऑपरेटर, स्पेशल ब्रांच और उत्पाद सिपाही के हज़ारों अभ्यर्थी जिनका डॉक्यूमेंट वेरिफ़िकेशन होकर बस ज्वाइनिंग बाक़ी थी उनकी रोज़ी रोटी भी सरकार ने छीन ली है।


  • 5. कैबिनेट सचिव छठी जेपीएससी का कट ऑफ़ डेट 1 अगस्त 2016 बता रहे हैं। जबकि वास्तविक रूप से वह एक अगस्त 2010 था। सातवीं जेपीएससी का कटऑफ उस हिसाब से अगस्त 2011 होना चाहिए। पिछले बार सातवीं जेपीएससी का जो विज्ञापन निकला था उसमें भी कट ऑफ़ साल 2011 रखा गया था। इसपर स्थिति स्पष्ट हो।


  • 6. जेपीएससी में प्रत्येक पेपर में न्यूनतम मार्क क्यों नहीं सुनिश्चित किया जा रहा है? स्थानीय भाषा या झारखंड का विशेष पेपर का महत्व क्यों नहीं है? क्या अर्थशास्त्र में फ़ेल होने वाले अभ्यर्थी को राज्य सरकार वित्त अधिकारी बनाना चाहती है?


  • 7. बिना नई नियोजन नीति या उसका मसौदा बनाए पुरानी को निरस्त करके चली आ रही नियुक्ति प्रक्रिया को डिरेल करने के पीछे किन लोगों की साज़िश है? और अगर पिछली सरकार के समय की सारी नियुक्तियां ग़लत लग रही है तो छठी जेपीएससी के लिए ये विशेष प्रेम माननीय मुख्यमंत्री का क्यों है ?







अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज