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छठी JPSC रिजल्ट रद्द मामले पर बीजेपी का हमला- CM हेमंत बताए किन अयोग्य लोगों को अफसर बनाने के लिए लिया यू-टर्न

छठी जेपीएससी पर हाईकोर्ट के फैसले आने के बाद बीजेपी हेमंत सरकार पर हमलावर है. (फाइल फोटो)

6th JPSC Results Canceled: बीजेपी ने परीक्षा दोबारा कराने की मांग की है. साथ ही प्रतिभावान युवाओं को अवसर से वंचित करने का आरोप लगाते हुए सरकार को छात्रों से माफी मांगने को कहा है.

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जमशेदपुर. झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High court) ने सोमवार को छठी जेपीएससी (6th JPSC) के मसले पर बड़ा फैसला सुनाते हुए परीक्षा की मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया. इससे 326 अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गये हैं. कोर्ट ने 8 सप्ताह में नई मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया है. कोर्ट के इस फैसले पर भाजपा ने हेमंत सरकार को आड़े हाथों लिया है.

बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि हाईकोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है. इससे उन मेहनतकश युवा प्रतिभागियों के साथ न्याय होगा, जिन्हें चंद अयोग्य लोगों को अफसर बनाने के लिए हेमंत सरकार ने अवसर से वंचित कर दिया था.

कुणाल षाड़ंगी ने ट्वीट कर लिखा 'ईश्वर के घर देर है पर अंधेर नहीं'. सीएम हेमंत सोरेन को यह बताना चाहिए कि किन चंद अयोग्य लोगों को अफ़सर बनाने की जल्दबाज़ी में उनकी सरकार ने छठी जेपीएससी के मसले पर यू-टर्न लिया था. पूरी परीक्षा फिर से आयोजित हो, राज्य सरकार माफी मांगे'

बीजेपी प्रवक्ता ने निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष में रहते जेएमएम और कांग्रेस ने लगातार जेपीएससी की कार्यशैली को लेकर सदन को बाधित किया था. वहीं सत्ता में आते ही तमाम विसंगतियों को नजरअंदाज कर मेधा सूची जारी कर दी गई. ऐसे में कोर्ट का निर्णय इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि कई चयनित उम्मीदवारों ने भी मेधा सूची पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए न्यायालय में परिवाद दायर किया था.

भाजपा ने परीक्षा को दोबारा कराने की मांग की है. वहीं प्रतिभावान युवाओं को अवसर से वंचित करने का आरोप लगाते हुए सरकार से माफी मांगने की मांग की है.

छात्र नेता मनोज कुमार ने भी हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पहली बार हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला सुनाया है. हेमंत सोरेन ने चुनाव के दौरान घोषणा किया था कि छठी जेपीएससी का दोबारा मेरिट लिस्ट जारी करेंगे, लेकिन सत्ता में आते ही सबकुछ भूल गए. यह फैसला सिंगल बेंच ने सुनाया. यह अब डबल बेंच में जाएगा. उसके बाद फिर सुप्रीम कोर्ट में जाएगा. छात्रों के भविष्य के साथ हमेशा खिलवाड़ किया गया है. छात्र अपना पढ़ाई करेंगे या फिर कोर्ट का चक्कर लगाते-लगाते अपनी जिंदगी बरबाद करेंगे.

नियमों के विरुद्ध तैयार हुई है मेरिट लिस्ट- कोर्ट

बता दें कि जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जेपीएससी ने नियमों के अनुसार मेरिट लिस्ट जारी नहीं की. मेरिट लिस्ट तैयार करने में क्वालिफाइंग मार्क्स को भी जोड़ दिया गया है, जबकि जेपीएससी के नियमों में क्वालिफाइंग मार्क्स जोड़ने का प्रावधान नहीं है. नियमों के खिलाफ तैयार मेरिट लिस्ट को वैध नहीं माना जा सकता. इस कारण अदालत इसे अवैध मानती है. और इस मेरिट लिस्ट को रद्द करती है.

जेपीएससी ने पिछले साल 23 अप्रैल को 326 अभ्यर्थियों को सफल घोषित करते हुए मेरिट लिस्ट सरकार को भेजी थी.
Published by:Naween Kumar Jha
First published: