आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद इलाज के अभाव बच्चे की मौत, CM हेमंत ने जताई नाराजगी

जमशेदपुर डीसी ने इस मामले में सिविल सर्जन को जांच का आदेश दिया है.

मां के मुताबिक अस्पतालों से उन्हें ये कहकर वापस भेज दिया जाता था कि आयुष्मान कार्ड के तहत सिर्फ ऑपरेशन ही होता है. इस संबंध में उन्होंने सिविल सर्जन से लेकर उपायुक्त दफ्तर तक के चक्कर लगाये.

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    जमशेदपुर. वैसे तो आयुष्मान योजना (Ayushman Bharat Scheme) को गरीबों के लिए संजीवनी माना जाता है. लेकिन जमशेदपुर में आयुष्मान कार्ड होते हुए भी 12 साल के एक बच्चे को इलाज नहीं मिला और उसकी मौत हो गई. बच्चा हृदय संबंधी रोग से पीड़ित था. परिवार उसके इलाज के लिए पिछले एक साल से आयुष्मान कार्ड लेकर इस अस्पताल से उस अस्पताल दौड़ रहा था. लेकिन हर जगह से उसे टाल-मटौल मिली. आखिरकार मंगलवार को बच्चे ने दम तोड़ दिया. सोशल मीडिया के जरिये जब सीएम हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) को इसकी सूचना मिली, तो उन्होंने तत्काल परिवार को मदद देने का डीसी को आदेश दिया.

    सिविल सर्जन से लेकर डीसी तक से नहीं मिली मदद

    जमशेदपुर के गोल पहाड़ी निवासी राजेश पात्रो ने अपने 12 वर्षीय बेटे के इलाज के लिए ही दौड़ भागकर आयुष्मान कार्ड बनवाया. लेकिन कार्ड होते हुए उनके बेटे का इलाज नहीं हो सका. अस्पतालों से उन्हें ये कहकर वापस भेज दिया जाता था कि आयुष्मान कार्ड के तहत सिर्फ ऑपरेशन ही होता है. इस संबंध में परिजन सिविल सर्जन से लेकर उपायुक्त दफ्तर तक के चक्कर लगाये. लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली. आखिरकार इलाज के अभाव में बेटे की मौत हो गई.

    टाल मटौल करते रहे अस्पताल

    बच्चे की मां के मुताबिक, जन्म लेने के 3 महीने बाद उन्हें पता चला कि बच्चे के दिल में छेद है. परिचितों से कर्ज लेकर उन्होंने इलाज शुरू कराया. जब परिवार के सदस्यों को आयुष्मान कार्ड की जानकारी मिली, तो वे दौड़ भागकर आयुष्मान कार्ड बनवाया. लेकिन कार्ड रहते हुए भी अस्पतालों ने उनके बेटे का इलाज करने से मना कर दिया. दादी के मुताबिक, जमशेदपुर के हर अस्पताल में कार्ड लेकर गुहार लगाई, लेकिन कहीं पर इलाज नहीं मिला.

    सिविल सर्जन ने दी ये सफाई 

    हालांकि जिले के सिविल सर्जन महेश्वर प्रसाद के मुताबिक, बच्चे के इलाज में कहीं कोई लापरवाही नहीं बरती गई. हायर सेंटर में दिखाने के बाद इंफेक्शन की बात सामने आई थी. इन्फेक्शन दूर होने के बाद उसका ऑपरेशन किया जाना था. जमशेदपुर के मेडिट्रिना अस्पताल में बच्चे का इलाज करवाया गया था. उसके बाद उसे सत्य साईं अस्पताल के लिए रेफर किया गया. लेकिन दोबारा परिजन उनके संपर्क में नहीं आए.

    इधर, जब इसकी सूचना सीएम हेमंत सोरेन को मिली, तो उन्होंने ट्वीट कर परिवार के प्रति संवेदना जताई. और तत्काल डीसी को पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता देने का आदेश दिया.

    सीएम हेमंत सोरेन का ट्वीट



    स्थानीय विधायक मंगल कालिंदी और सांसद विद्युत वरण महतो ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. डीसी ने सिविल सर्जन को मामले की जांच का आदेश दिया है.

    रिपोर्ट- आशीष तिवारी

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