Lockdown के बीच श्मशान घाटों पर जमा हुईं अस्थियां, आत्माओं को मोक्ष का इंतजार!

लॉकडाउन के कारण जमशेदपुर के श्मशान घाटों बड़ी संख्या में अस्थि कलश जमा हो गये हैं.

लॉकडाउन के कारण जमशेदपुर के श्मशान घाटों बड़ी संख्या में अस्थि कलश जमा हो गये हैं.

जमशेदपुर के सुवर्णरेखा नदी पर स्थित श्मशान घाट पर मृत लोगों की अस्थियों को सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि लॉकडाउन (Lockdown) खत्म होने के बाद इन्हें पवित्र नदियों में प्रवाहित किया जा सके.

  • Share this:

जमशेदपुर. लॉकडाउन (Lockdown) का असर अंतिम संस्कार से जुड़े कामों पर भी दिखा रहा है. लोग अपने प्रियजनों की अस्थियां गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों में विसर्जित नहीं कर पा रहे. हिन्दू धर्म में मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए अस्थियों को पवित्र नदियों में प्रवाहित करने की परंपरा है. लेकिन लॉकडाउन के चलते जमशेदपुर के लोग ऐसा नहीं कर पा रहे हैं. इस वजह से शहर के सुवर्णरेखा घाट और पारवर्ती घाटों में सैकड़ों की संख्या में अस्थि कलश (Bone Urn) जमा हो गये हैं. परिवारवालों को अब लॉकडाउन के खत्म होने का इंतजार है, जब वे इन अस्थियों को लेकर पवित्र नदियों में विसर्जित करेंगे और जाने वाले की आत्मा की शांति के लिए मोक्ष की कामना करेंगे.

गंगा के बजाये शहर की नदियों में हो रही प्रवाहित

हालांकि सुवर्णरेखा घाट और पारवर्ती घाटों में अस्थि कलशों को काफी सुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है. अदला-बदली न हो, इसके लिए उनपर नाम लिख दिए जाते हैं. यहां रोजाना अस्थियों की पूजा-अर्चना भी की जा रही है. हालांकि कई परिवार ऐसे भी हैं, जो लॉकडाउन खत्म होने तक का इंतजार किए बिना प्रियजन की अस्थियों को शहर की ही नदियों में प्रवाहित कर दे रहे हैं.



परिवारवालों को लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार 
कुछ अस्थि कलश इसलिए रखे हुए हैं, क्योंकि उनको लेने वाले इस लॉकडाउन में शहर से बाहर फंसे हुए हैं.  भुइयांडीह के रहने वाले राजू कुमार के भाई का 4 अप्रैल को निधन हो गया. राजू ने भी अपने भाई की अस्थि सुवर्णरेखा घाट में रखवा दी है. उसे भी लॉकडाउन के खत्म होने का इंतजार है. उनका कहना है कि भाई की अस्थियों को गंगा में विसर्जित करना है, लेकिन लॉकडाउन के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे हैं. इसलिए अस्थियों को घाट पर रखवा दिया है.

जमशेदपुर के रहने वाले अशोक झा फिलहाल पंजाब में फंसे हुए हैं. इधर, उनके पिता की मृत्यु हो गई है. परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया. लेकिन उनकी अस्थियों को पारवर्ती घाट में सुरक्षित रखवा दिया गया है. लॉकडाउन खत्म होने के बाद अशोक पंजाब से जमशेदपुर आएंगे और पिता की अस्थियों को ले जाकर पवित्र नदी में प्रवाहित करेंगे.

नई अस्थियों को रखने के लिए कम पड़ रही जगह  

सुवर्णरेखा घाट के संयुक्त सचिव गणेश राव ने बताया कि शवों के अंतिम संस्कार के बाद परिवारवालों के आग्रह पर अस्थि कलश को सुरक्षित रखा जा रहा है. लॉकडाउन के कारण लोग अस्थि ले नहीं जा रहे. इसलिए बड़ी संख्या में कलश जमा हो गये हैं. नई अस्थियों को रखने के लिए काफी जगह बची है. लेकिन जब तक लॉकडाउन खत्म नहीं होगा, जगह खाली नहीं होंगी.

ये भी पढ़ें- घाटशिला: 15 दिन से क्वारंटाइन में रह रहे 92 मजदूरों ने किया हंगामा, जाना चाहते हैं घर

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज