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एवरेस्ट फतेह करने निकले बचेंद्री पाल

एवरेस्ट फतेह करने निकले बचेंद्री पाल

आम तौर पर आईआईटी करने के बाद हाई सैलरी पैकेज पर युवा लॉक होते हैं और ज्यादातर तो विदेश चले जाते हैं, लेकिन हम लोगों में से एक ऐसे युवा की कहानी आपको बताएंगे जिसने आईआईटी के बाद पहले तो टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनी को ज्वाइन किया, लेकिन दो साल काम करने के बाद पर्वतारोहण का रास्ता अपना लिया।

आम तौर पर आईआईटी करने के बाद हाई सैलरी पैकेज पर युवा लॉक होते हैं और ज्यादातर तो विदेश चले जाते हैं, लेकिन हम लोगों में से एक ऐसे युवा की कहानी आपको बताएंगे जिसने आईआईटी के बाद पहले तो टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनी को ज्वाइन किया, लेकिन दो साल काम करने के बाद पर्वतारोहण का रास्ता अपना लिया।

आम तौर पर आईआईटी करने के बाद हाई सैलरी पैकेज पर युवा लॉक होते हैं और ज्यादातर तो विदेश चले जाते हैं, लेकिन हम लोगों में से एक ऐसे युवा की कहानी आपको बताएंगे जिसने आईआईटी के बाद पहले तो टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनी को ज्वाइन किया, लेकिन दो साल काम करने के बाद पर्वतारोहण का रास्ता अपना लिया।

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    आम तौर पर आईआईटी करने के बाद हाई सैलरी पैकेज पर युवा लॉक होते हैं और ज्यादातर तो विदेश चले जाते हैं, लेकिन हम लोगों में से एक ऐसे युवा की कहानी आपको बताएंगे जिसने आईआईटी के बाद पहले तो टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनी को ज्वाइन किया, लेकिन दो साल काम करने के बाद पर्वतारोहण का रास्ता अपना लिया।

    पर्वतारोहण का रास्ता अपनाने के बाद उसने फिर भी नौकरी नहीं छोड़ी बल्कि टाटा स्टील ने अपने इस इंजीनियर को बचेन्द्री पाल को सौंप दिया जो भारत की पहली माउंट एवरेस्ट विजेता हैं और टाटा स्टील के एडवेंचर कार्यक्रमों की चीफ हैं।

    यहीं नहीं टाटा स्टील में कार्यरत महिला लोको ट्रैफिक स्टाफ पायो मूर्मू भी उस पूर्व इंजीनियर की राह पर निकल पड़ी है और आज यह दोनों माउंट एवरेस्ट फतेह करने निकल रहे हैं, लेकिन यह सबकुछ एक झटके में नहीं हुआ।

    कुछ साल पहले आईआईटी मुंबई से पढ़ाई पूरी करने के बाद राजस्थान के हेमंत गुप्ता ने टाटास्टील के जमशेदपुर प्लांट में अपना योगदान दिया। दो साल बतौर इंजीनियर कार्य करने के दौरान वे टाटा स्टील के एडवेंचर कार्यक्रमों की चीफ बचेन्द्री पाल के संपर्क में आए। फिर क्या था आईआईटी के दौरान किए गए कुछ पर्वतारोहण की यादें ताज़ा हो गईं और हेमंत का मन तो जैसे इसी के लिए बना था।

    उन्होंने कंपनी से निवेदन किया कि वह इंजीनियर की जगह एडवेंचर कार्यक्रमों में उनसे काम लें, किसी भी कंपनी के लिए यह करना उतना आसान नहीं था लेकिन टाटा स्टील ने हेमंत को यह मौका दिया और आज हेमंत माउंट एवरेस्ट फतेह करने निकल पड़े हैं।

    कुछ ऐसी ही कहानी पायो मूर्मू की भी है। पायो भी टाटा स्टील की कर्मचारी है, फर्क बस इतना है कि पायो उतनी पढ़ी लिखी नहीं है और बतौर लोको ट्रैफिक स्टाफ टाटा स्टील में कार्यरत है।

    बचेन्द्री पाल ने पायो की प्रतिभा को बखूबी पहचान लया था यही वजह है कि वह कई एडवेंचर कार्यक्रमों की सदस्य रह चुकी हैं और अब दुनिया की सबसे उंची चोटी फतेह करने निकल पड़ी हैं।
    बचेन्द्री पाल के एडवेंचर कार्यक्रमों में शरीक होकर पायो ने अलग पहचान बनाई और ईनाम स्वरूप टाटा स्टील में उसे स्थाई कर दिया गया। वहीं बचेन्द्री पाल हेमंत गुप्ता को टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन विभाग का इंचार्ज बनाने की तैयारी में हैं।

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