चौथी से 9वीं में पहुंच गई छात्रा, लेकिन नहीं बना आधारकार्ड

उपायुक्त अमित कुमार ने कहा कि यह एक अनोखा मामला है. जिले में ऐसा मामला पहले कभी सामने नहीं आया. इसको सुलझाने के लिए यूआईडीआई की पूरी टीम लगी हुई है. तकनीकी समाधान निकालने की कोशिश हो रही है.

News18 Jharkhand
Updated: June 20, 2019, 6:28 PM IST
चौथी से 9वीं में पहुंच गई छात्रा, लेकिन नहीं बना आधारकार्ड
वैष्णवी अग्रवाल
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Updated: June 20, 2019, 6:28 PM IST
जमशेदपुर की 9वीं की छात्रा वैष्णवी वर्णवाल का आधार पिछले पांच साल से अधर में लटका हुआ है. एनरॉलमेंट तो हुआ, लेकिन आधारकार्ड नहीं बन पा रहा. अब वैष्णवी को दसवीं में रजिस्ट्रेशन के लिए जुलाई में स्कूल में आधारकार्ड जमा करना है. ऐसे में परिवारवाले यहां- वहां चक्कर काटने पर मजबूर हैं. उधर यह मामला जिला प्रशासन के लिए भी परेशानी का सबब बन गया है.

5 साल से नहीं बन पा रहा आधारकार्ड

क्या दो लोगों के बायोमैट्रिक्स एक हो सकते हैं? जमशेदपुर के परसुडीह की रहने वाली वैष्णवी वर्णवाल के मामले में इस सवाल का जवाब हां हो सकता है. जुस्को स्कूल बिष्टुपुर की 9वीं की छात्रा वैष्णवी का बायोमैट्रिक्स परसुडीह की ही एक 65 वर्षीय महिला से मैच दिखाता है. इसलिए एनरॉलमेंट के बावजूद उसका आधारकार्ड नहीं बन पा रहा है. वैष्णवी की मां ज्य़ोति वर्णवाल और पिता अनिल वर्णवाल पिछले पांच साल से बेटी का आधारकार्ड बनवाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वैष्णवी के बायोमैट्रिक्स पर किसी और का डाटा दर्ज दिखाने की वजह से यह रिजेक्ट हो जाता है.

कारण बताया, समाधान नहीं

वैष्णवी की मां ज्य़ोति वर्णवाल ने जब आरटीई के जरिये यूआईडीआई से इसका कारण जानना चाहा, तो इतना बताया गया कि यह मिक्स बायोमैट्रिक मैच का केस है. लेकिन समाधान कैसे होगा, ये नहीं बताया गया. इसी बीच मां ने रांची यूआईडीआई से संपर्क साधा, तो बताया गया कि अगर 65 वर्षीय वह महिला अपना आधार अपडेट करा ले, तो वैष्णवी का आधारकार्ड बन सकता है. लेकिन इस बात को वह महिला मानने को तैयार नहीं. थक हारकर मां ने उपायुक्त का दरवाजा खटखटाया है.

डीसी ने समाधान का दिया भरोसा 

उपायुक्त अमित कुमार ने कहा कि यह एक अनोखा मामला है. जिले में ऐसा मामला पहले कभी सामने नहीं आया. इसको सुलझाने के लिए यूआईडीआई की पूरी टीम लगी हुई है. तकनीकी समाधान निकालने की कोशिश हो रही है.
एनरॉलमेंट में भूल का नतीजा 

वैष्णवी की मां की माने तो ये सारी परेशानी एनरॉलमेंट एजेंसी के चलते हुई है. जब वैष्णवी का एनरॉलमेंट कराया गया, तो उस वक्त बड़े पैमाने पर लोगों के आधार बनाने की प्रक्रिया चल रही थी. उसी दरम्यान वैष्णवी के आंकड़ों को बिना डिलीट किए उनके पड़ोस में रहने वाली एक महिला का इनरॉलमेंट कर दिया गया. इस वजह से दोनों का डाटा मैच दिखा रहा है.

रिपोर्ट- अन्नी अमृता

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