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अद्भुत झारखंड: इस गांव में सात फेरे लिए बिना वर्षों से लिव-इन में रह रहे कपल्‍स, बच्‍चे हो चुके हैं बड़े

अद्भुत झारखंड: इस गांव में सात फेरे लिए बिना वर्षों से लिव-इन में रह रहे कपल्‍स, बच्‍चे हो चुके हैं बड़े

पूर्वी सिंहभूम के गांव में आज भी कई परिवार है जो लव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं.

पूर्वी सिंहभूम के गांव में आज भी कई परिवार है जो लव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं.

Jamshedpur News: अन्य गांवों की तरह लोगों का घर परिवार है, लेकिन इनमें ज्यादातर कपल्‍स ऐसे भी हैं जिनकी शादी नहीं हुई है. इसके बावजूद वे साथ रह रहे हैं और उनके बच्‍चे भी बड़े हो चुके हैं. ये सभी जोड़े बिना शादी के लिव-इन रिलेशनशिप में जिंदगी गुजार रहे हैं.

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जमशेदपुर. आज भारत के मेट्रो सिटी में भी लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में खुलकर रहने की आजादी नहीं है, वहीं झारखंड के एक गांव में वर्षों से लोग बिना शादी के साथ रह रहे हैं. पूर्वी सिंहभूम के इस गांव में अन्य गांवों की तरह लोगों का घर परिवार है, लेकिन इनमें ज्यादातर लोग ऐसे हैं जिनकी पारंपरिक रीति-रिवाजों से शादी नहीं हुई है. आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि अब उनके बच्चे भी बड़े हो चुके हैं. ये सभी जोड़े बिना शादी के लिव-इन रिलेशनशिप में जिंदगी गुजार रहे हैं. शादी नहीं करने का कारण इन दम्पत्तियों ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति को बताया है.

यह कहानी है पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला के जोजोगोड़ा टोला के बेतालपूर की. इस गांव में आज भी कई कपल्‍स लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं. इनलोगों ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे लोग शादी नहीं कर पाए हैं. लिहाजा, वे वर्षों से लिव-इन रिलेशनशिप में पति-पत्नी की तरह रहते आ रहे हैं. इनमें से कई के बच्चे बड़े हो चुके हैं. आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से वो अब तक शादी की अन्य रस्में नहीं निभा पाए हैं. लिव-इन में रहने वाली महिलाएं अपनी मांग में सिंदूर नहीं लगाती हैं. वो बस दिखावे के लिए हाथ में एक कड़ा पहनती हैं. वहीं, गांव के लोग इसे लव मैरिज मानते हैं.

आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से नहीं कर पाते हैं शादी

सिंगो मुर्मू और मुगली मुर्मू ने बताया कि हम दोनों की मुलाकात एक शादी समारोह में हुई थी. उसके बाद सिंगो मुर्मू मुगली को गांव परिवार के बीच ले आया. इसकी जानकारी ग्राम प्रधान को भी दी गई. उन्हें आर्थिक स्थिति ठीक होने के बाद सिंदूर दान की बात कही गई. ग्राम प्रधान और ग्रामीण के सामने एक कड़ा पहनाया गया, तब से वे दोनों पति-पत्नी की तरह गांव में रह रहे हैं. लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हुए उन्हें 5 साल हो चुके हैं.

उन्होंने बताया कि उनके आदिवासी समाज में परम्परा है कि लड़की गांव के प्रधान और लड़का गांव के प्रधान में पोन का लेनदेन नहीं होगा और सिंदूर दान सहित समाज के लोगों को भोज नहीं देते तब तक हमलोगो की शादी की पूरी मान्यता प्राप्त नहीं होती है.

इसी तरह से गांव की सुशीला मार्डी ने बताया कि उनका प्रेम एक हाट से शुरू हुआ और तब से वे गांव में अपने पार्टनर के साथ पति के साथ लिव-इन रिलेशन में रहती आ रही हैं, जब आर्थिक स्थिति ठीक होगी तो वे शादी कर लेंगे.

 क्‍या कहते हैं ग्रामीण

ग्रामीणों ने बताया कि बेतालपुर में 6-8 परिवार हैं जो लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं. जब गांव का कोई लड़का आपसी सहमति से किसी लड़की को गांव लाता है तो इसकी सूचना देता है. साथ ही शादी के लिए समय भी मांगता है. गांव के सामने वह उस लड़की को कड़ा पहनाता है और साथ में रहता है. ग्रामीण बताते हैं कि समाज में जब तक लड़की पक्ष के प्रधान और लड़का पक्ष के प्रधान के बीच तालमेल पूरी तरह बन जाता है, तब लड़का पक्ष भोज देकर आदिवासी परंपरा से सिंदूर दान कर शादी कर लेता है. इसके बाद उसे पूरी मान्यता मिलती है. आज भी इन परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहते आ रहे हैं, जिसे गांव में लोग लव मैरिज कहते हैं.

Tags: Jamshedpur news, Jharkhand news, Live in Relationship

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