विद्युतवरण महतो: झारखंड आंदोलन के लिए छोड़ दी पढ़ाई, 10 साल संघर्ष के बाद मिली पहली चुनावी जीत

कॉलेज के दिनों में ही विद्युतवरण का झुकाव सियासत की ओर हुआ. उन दिनों अलग झारखंड के लिए आंदोलन चरम पर था. विद्युतवरण जेएमएम के कद्दावर नेता निर्मल महतो के संपर्क में आकर झारखंड आंदोलन से जुड़ गये.

News18 Jharkhand
Updated: May 10, 2019, 7:42 PM IST
विद्युतवरण महतो: झारखंड आंदोलन के लिए छोड़ दी पढ़ाई, 10 साल संघर्ष के बाद मिली पहली चुनावी जीत
विद्युत वरण महतो
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Updated: May 10, 2019, 7:42 PM IST
जमशेदपुर लोकसभा सीट से दूसरी बार संसद जाने की जुगत में जुटे बीजेपी प्रत्याशी विद्युतवरण महतो का जन्म 15 फरवरी 1962 को सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर स्थित कृष्णापुर औद्योगिक क्षेत्र में हुआ. स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने 12वीं की पढ़ाई टाटा कॉलेज चाईबासा से की. बीएससी में दाखिला लिया, लेकिन परीक्षा नहीं दिए.

पढ़ाई छोड़ झारखंड आंदोलन में कूदे 

कॉलेज के दिनों में ही विद्युतवरण का झुकाव सियासत की ओर हुआ. उन दिनों अलग झारखंड के लिए आंदोलन चरम पर था. विद्युतवरण जेएमएम के कद्दावर नेता निर्मल महतो के संपर्क में आकर झारखंड आंदोलन से जुड़ गये. और अगले 35 साल से इसके लिए संघर्ष करते रहे.

10 साल के संघर्ष के बाद मिली पहली जीत 

साल 2000 में अगल राज्य बनने के बाद विद्युतवरण ने चुनावी राजनीति का रूख किया. 2000 में पहला विधानसभा चुनाव जेएमएम के टिकट पर बहरागोड़ा से लड़े. लेकिन बीजेपी के दिनेश षाड़ंगी से हार गये. 2005 में दोबारा जेएमएम के टिकट पर बहरागोड़ा का दंगल लड़े. लेकिन इस बार भी विद्युतवरण को बीजेपी के दिनेश षाड़ंगी से हार मिली. लेकिन 2009 में उन्होंने पिछली दोनों हारों का बदला लेते हुए दिनेश षाड़ंगी को हराकर पहली बार बहरागोड़ा से विधायक बने.

जेएमएम छोड़ बीजेपी में हुए शामिल 

2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले विद्युतवरण जेएमएम का साथ छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये. विधायकी से इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर जमशेदपुर सीट से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़े. जेवीएम प्रत्याशी अजय कुमार के साथ सीधा मुकाबले में विद्युतवरण को जीत हासिल हुई. एक बार फिर विद्युतवरण जमशेदपुर की जंग लड़ रहे हैं. लेकिन इस बार उनका मुकाबला जेएमएम के चंपई सोरेन से है.
सीएम रघुवर दास के हैं करीबी    

विद्युवरण सीएम रघुवर दास के बेहद करीबी माने जाते हैं. इसका उनको सियासी लाभ मिला है. आरएसएस में भी उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. उनकी छवि भी साफ- सुथरी रही है. ऐसे में आलोचकों को उनपर निशाना साधने का ज्यादा मौका नहीं मिलता. जमशेदपुर सीट कुरमी बहुल सीट है. इसलिए वह जातीय समीकरण में भी यहां पर फिट बैठते हैं.

आम लोगों के बीच रहने वाले नेता

खुद को लो प्रोफाइल रहने वाले विद्युतवरण आम लोगों के सजह उपलब्ध रहते हैं. अपने पांच साल के संसदीय कार्यकाल में उन्होंने क्षेत्र में अच्छा काम किया. जुगसलाई और गोविंदपुर में रेलवे ओवरब्रिज और धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का शिलान्यास करवाया. एचसीएल और यूसीआईएल की बंद पड़ी खदानों को खुलवाकर हजारों लोगों को रोजगार दिलवाया. उनकी लोकसभा में अच्छी उपस्थिति रही. इस दौरान वह जनहित के मुद्दे खूब उठाये.

संगठन में भरपूर पकड़ नहीं 

हालांकि विद्युतवरण के साथ कुछ कमजोर पहलू भी हैं. वह मूलरूप से भाजपाई नहीं हैं. इसलिए संगठन में उनका भरपूर पकड़ नहीं है. पार्टी के भीरत सभी शक्ति केन्द्रों का समान विश्वास भी वह पिछले पांच साल में हासिल नहीं कर पाए. क्षेत्र के कुछ महत्वपूर्ण काम भी बचे रह गये. जैसे रांची- टाटा एनएच-33 को पूरा नहीं करवा पाना, लौहनगरी में ईएसआईसी अस्पताल नहीं खुलवा पाना.

इनपुट- अन्नी अमृता

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