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झारखंड: कोचांग में पांच युवतियों से गैंग रेप के मामले में सभी आरोपी बरी

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Updated: December 6, 2019, 6:25 AM IST
झारखंड: कोचांग में पांच युवतियों से गैंग रेप के मामले में सभी आरोपी बरी
कोचांग में पांच युवतियों से गैंग रेप के मामले में सभी आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है. (प्रतीकात्मक फोटो)

अदालत (Court) ने पिछले वर्ष कोचांग के जंगलों में पांच युवतियों के साथ गैंग रेप (Gang Rape) से जुड़े दूसरे मामले में एक पादरी समेत सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया है.

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  • Last Updated: December 6, 2019, 6:25 AM IST
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खूंटी (झारखंड). देश भर में महिलाओं के साथ हो रहे रेप और उनकी हत्या को लेकर मौत की सजा की मांग हो रही है. लेकिन हकीकत यह है कि लोग महिलाओं का साथ देने में कहीं न कहीं कमजोरी दिखा रहे हैं. इसकी वजह से आरोपियों को सजा नहीं मिल पाती है. एक ऐसा ही मामला झारखंड में सामने आया है.

यहां की एक अदालत ने पिछले वर्ष कोचांग के जंगलों में पांच युवतियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म से जुड़े दूसरे मामले में एक पादरी समेत सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने प्राथमिकी दर्ज कराने वाले एक गैर सरकारी संगठन के संचालक समेत किसी गवाह के अदालत में पेश न होने के चलते यह फैसला सुनाया है. इस मामले में सिर्फ एनजीओ का वाहन चालक ही गवाह के तौर पर पेश हुआ था.

खूंटी के न्यायाधीश राजेश कुमार की अदालत ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले गैर सरकारी संगठन के संचालक संजय शर्मा और अन्य गवाहों के अदालत में पेश नहीं होने के कारण साक्ष्य के अभाव में इस मामले के आरोपी पादरी अल्फोंस सहित सभी छह आरोपियों को बुधवार को बरी कर दिया.

इन आरोपियों को अदालत ने किया बरी

बरी होने वालों में स्थानीय चर्च का फादर अल्फोंस आइंद, बाजी सामद उर्फ टकला, अजुब सांडीपूर्ति, जोनास मुंडा, जॉन जुनास तिड़ू और बलराम सामद शामिल हैं.

क्या था पूरा मामला
प्राथमिकी के अनुसार चर्च से पांच आदिवासी युवतियों का अपहरण कर उनके साथ दुष्कर्म और अप्राकृतिक कर्म किया गया था. खूंटी में पत्थलगड़ी के दौरान नुक्कड़ नाटक से लोगों को सामाजिक मुद्दों पर जागरूक करने पहुंची पांच आदिवासी युवतियों के साथ जून 2018 में गैंग रेप हुआ था. जिसमें दो प्राथमिकी दर्ज की गई थीं. इसमें फादर अल्फोंस आइंद सहित छह को आरोपित बनाया गया था. इस मामले में उस समय खूंटी के इलाके में पत्थलगड़ी करवाने वाले गिरोह का भी हाथ पाया गया था.निचली अदालत ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा
दुष्कर्म पीड़ित युवतियों की ओर से दर्ज कराये पहले मामले में निचली अदालत ने 17 मई 2019 को फादर अल्फोंस सहित सभी छह आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन दूसरे मामले में गवाहों की पेशी न होने से अभियोजन पक्ष मामला साबित करने में नाकाम रहा.

इस कारण अदालत ने सभी आरोपियों को बुधवार शाम बरी कर दिया. अदालत में अभियोजन की ओर से केवल एक गवाही दर्ज कराई गई थी और एनजीओ की युवतियों और अन्य सहकर्मियों की गाड़ी का ड्राइवर संतोष हेंब्रम ही इस मामले में अपनी गवाही देने अदालत पहुंचा था.

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First published: December 6, 2019, 6:24 AM IST
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