जिंदगी में अब कुछ भी नहीं बचा..इसलिए नहीं जीना चाहता, यह कहकर इंजीनियर ने कर लिया आत्मदाह

गोलमुरी के कैलाश नगर स्थित अपने घर के पास ही प्रभात ने शरीर पर केरोसिन उढेल कर आग लगा ली. इसके बाद वह चीखता हुआ घर की ओर दौड़ा और पड़ोसी के घर के आगे जा गिरा.

News18 Jharkhand
Updated: August 9, 2019, 9:17 AM IST
जिंदगी में अब कुछ भी नहीं बचा..इसलिए नहीं जीना चाहता, यह कहकर इंजीनियर ने कर लिया आत्मदाह
नौकरी छूटने से परेशान इंजीनियर ने कर लिया आत्मदाह
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Updated: August 9, 2019, 9:17 AM IST
जमशेदपुर में नौकरी छूटने से परेशान एक इंजीनियर ने आत्मदाह कर लिया. वह टाटा मोटर्स की एंसिलरी इंपीरियर ऑटो इंडस्ट्री में जूनियर इंजीनियर (जेई) के पद पर कार्यरत था. लेकिन कंपनी ने उसे एक महीना पहले काम पर आने से रोक दिया. इसके बाद से प्रभात कुमार लगातार तनाव में रह रहा था.

घर के पास कर लिया आत्मदाह 

परिजनों ने बताया कि गुरुवार सुबह गोलमुरी के कैलाश नगर स्थित अपने घर के पास ही प्रभात ने शरीर पर केरोसिन उढेल कर आग लगा ली. इसके बाद वह चीखता हुआ घर की ओर दौड़ा और पड़ोसी के घर के आगे जा गिरा. उसने जोर से अपनी मां को आवाज लगाई. तब तक आस पड़ोस के लोग मौके पर जुट गये और प्रभात के शरीर में लगी आग को बुझाया गया.

प्रभात को तत्काल टाटा मेन हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां दो घंटे बाद उसकी मौत हो गई. इलाज के दौरान प्रभात बार-बार एक ही चीज दोहरा रहा था कि उसकी जिंदगी में अब कुछ भी नहीं बचा, इसलिए वह नहीं जीना चाहता.

नौकरी जाने से तनाव में था

घरवालों के मुताबिक नौकरी से बैठाए जाने के कारण प्रभात तनाव में था और गुमसुम रहने लगा था. लेकिन वह आत्मदाह जैसा कदम उठा लेगा, इसका किसी को अंदेशा नहीं था.

प्रभात के पिता तारकनाथ ऑटो चालक हैं. घर की माली हालत अच्छी नहीं है. उधर, टाटा मोटर्स में लगातार ब्लॉक क्लोजर के कारण छोटी कंपनियों पर मंदी का असर पड़ा है. ऐसे में कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को काम पर आने से रोक दिया है.
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First published: August 9, 2019, 9:17 AM IST
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