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जमशेदपुर के पप्‍पू सरदार का है अनोखा अंदाज, इस बॉलीवुड एक्‍ट्रेस के फोटो वाली बंधवाई 250 राखियां

माधुरी दीक्षित के फैन पप्‍पू सरदार ऐसे मनाते हैं रक्षा बंधन.

माधुरी दीक्षित के फैन पप्‍पू सरदार ऐसे मनाते हैं रक्षा बंधन.

माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) के फैन के रूप में देश-विदेश में मशहूर हो चुके जमशेदपुर के पप्‍पू सरदार (Pappu Sardar) न ...अधिक पढ़ें

    आम तौर पर बहनें अपने भाईयों को 'मेरे प्यारे भैया' लिखी राखियां बांधना पसंद करती हैं, लेकिन माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit ) के फैन और उनको अपनी बहन मानने वाले जमशेदपुर (Jamshedpur) के पप्पू सरदार (Pappu Sardar) की बात ही निराली है. उन्होंने आज लगभग ढ़ाई सौ बहनों से वैसी राखियां ( Raksha Bandhan ) बंधवाई जिन पर माधुरी की फोटो के साथ 'मेरी प्यारी बहना' लिखा था. इसके पीछे पप्पू सरदार का तर्क है कि जब भी वे अपनी कलाई देखें तो उन्हें ये नजर आए मेरी प्यारी बहना न कि मेरे प्यारे भैया. यकीनन यह हैरान करने वाली बात है.

    बहरहाल, पप्पू सरदार ये मानते हैं कि बहनें जब राखी बांधती हैं तो उससे भाईयों को एक अलग ही ताकत मिलती है जो राखी की परंपरा को साल दर साल आगे बढ़ाती है. पप्पू सरदार हर साल रक्षा बंधन के मौके पर अनाथ और बेसहारा बहनों से मिलने चेशायर होम, सुदंरनगर जरूर जाते हैं जहां राखी का भव्य कार्यक्रम आयोजित होता है. इस साल भी पप्पू सरदार चेशायर होम पहुंचे जहां लगभग ढ़ाई सौ बहनों से राखी बंधवाई.

    सबसे पहली राखी उन्होंने माधुरी दीक्षित के नाम की बंधवाई और फिर उसके बाद लगातार सिलसिला शुरू हुआ जो घंटों तक चलता रहा. चेशायर होम की सिस्टर से लेकर शब्दों में अपनी भावनाएं व्यक्त न कर पाने वाली दिव्यांग और स्पेशल बहनों ने प्रफुल्लित होकर पप्पू सरदार को राखी बांघी. पप्पू सरदार अपनी सभी बहनों को शगुन के तौर पर तोहफा भी जरूर देते हैं, लेकिन उनकी बहनों के लिए उनका यूं आकर राखी बंधवाना ही बहुत बड़ी बात होती है.

    इस बार सबसे पहली राखी उन्होंने माधुरी दीक्षित के नाम की बंधवाई और फिर उसके बाद लगातार सिलसिला शुरू हुआ जो घंटों तक चलता रहा.


    आपको बता दें कि चेशायर होम में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जो दिव्यांग हैं, अनाथ हैं या फिर जिनका कोई अपना नहीं है. ऐसे में गाहे बगाहे तीज त्योहर के बहाने पप्पू सरदार उनसे एक बड़े भाई की तरह मिलने आते हैं जो उनके आत्मविश्वास को बढ़ा देता है.

    चेशायर होम की ये बात है निराली
    कहते हैं कि प्रेम को न तो उपजाया जा सकता है और न ही ये कहीं बाजार में बिकता है. रक्षा बंधन ऐसा ही अद्भुत प्रेम का बंधन है जहां जाति और धर्म की दीवारें टूट जाती हैं और स्वाभाविक प्रेम की अविरल धारा बहती है. चेशायर होम में हर साल आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में कुछ ऐसी बहनें भी पहुंचती हैं, जिनका कोई अपना भाई नहीं और उन्होंने पप्पू सरदार को ही अपना भाई बना लिया है.

    ऐसी ही एक बहन है परवीन जिसकी जिंदगी में सब कुछ है पर कमी है तो एक भाई की और इसलिए उसने पप्पू सरदार को अपना भाई बनाया है. वो हर साल धर्म की दीवार तोड़कर इस परंपरा का निर्वाह करती है. पप्पू सरदार उत्सव का हर दिन अपनी बहन माधुरी दीक्षित को समर्पित कर देते हैं.

    परवीन मुसलमान होने के बाद भी पिछले काफी समय से पप्‍पू सरदार को राखी बांधती हैं.


    सालों पहले माधुरी के फैन के रूप में देश विदेश में मशहूर हो चुके पप्पू सरदार के बारे में जब माधुरी दीक्षित को पता चला तो उन्होंने पप्पू सरदार को राखी भेजी थी, जिसके बाद से पप्पू सरदार ने उनको अपनी बहन के रूप में पूजना शुरू कर दिया. लिहाजा तब से लेकर आज तक वे रक्षा बंधन के दिन को भी माधुरी दीक्षित के नाम कर देते हैं, लेकिन वह अपनी उन अनाथ-बेसहारा बहनों को नहीं भूलते जिनका कोई अपना नहीं. बकौल पप्पू सरदार 'इन बहनों के प्यार से जिंदगी आसान हो जाती है.'

    चाट की दुकान से ब्रांड एंबेसडर तक
    पप्पू सरदार ने मनोहर चाट नाम से साकची वसंत टॉकीज इलाके में एक छोटी सी दुकान से शुरुआत की थी और माधुरी के फैन के रूप में जाने जाते थे. धीरे धीरे उनकी चाट की दुकान लोकप्रिय होने लगी, क्योंकि उसमें माधुरी दीक्षित की फोटो लगी होती थी. साथ ही माधुरी दीक्षित का जन्म दिन इतने शानदार तरीके से मनाने लगे कि देश-विदेश की मीडिया जमशेदपुर पहुंचने लगी. धीरे-धीरे माधुरी के फैन के रूप में उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी और उनकी दुकान भी बड़ी होती चली गई.

    इसी बीच पप्पू सरदार सामाजिक तौर पर भी सक्रिय होने लगे फिर चाहे वो आम आदमी के लिए खड़े हो जाने की बात हो या गरीब गुरबा की मदद, पप्पू सरदार हमेशा तत्पर रहते. हाल ही में उन्हें जमशेदपुर अक्षेस ने स्वच्छ भारत अभियान के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर चुना था. पप्पू सरदार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी तत्पर रहते हैं. वे अक्सर तरह तरह का हुलिया बनाकर किसी खास मुददे पर लोगों को जागरूक करने के लिए पहुंच जाते हैं. अक्सर लोग उन्हें वैसे वेश में पहचान नहीं पाते और जब पप्पू अपना असली चेहरा दिखाते हैं तब लोग उस खास मुद्दे और उसकी अहमियत को समझ जाते हैं. जबकि जिला प्रशासन अक्सर तरह तरह के अभियानों में पप्पू सरदार की मदद लेना नहीं भूलता.

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    Tags: Jharkhand news, Madhuri dixit, Raksha bandhan

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