जमशेदपुर: गांव छोड़ने को ना हाथी तैयार ना ही इंसान, 2 साल से जारी है वर्चस्व की जंग

हाथी के तांडव के चलते गांव के लोग रातभर जागते रहते हैं.

हाथी के तांडव के चलते गांव के लोग रातभर जागते रहते हैं.

Jamshedpur News: लोगों का कहना है कि हाथियों को गांव से दस किलोमीटर दूर तक खदेड़ा दिया जाता है, लेकिन दूसरे दिन हाथी गांव आ धमकते हैं. जंगल के बीच गांव होने के कारण हाथियों का तांडव यहां जारी है.

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जमशेदपुर. पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल के बहरागोडा प्रखंड में हाथियों (Elephant) का तांडव जारी है. हालत तो यह है कि अब ग्रामीण हताश होने लगे हैं. बीते दो सालों से हाथियों का झुंड बहरागोडा के लुगाहारा गांव में डेरा डाल रखा है. हाथियों को खदेड़ने के लिये लगातार वन विभाग (Forest Department) की QRT टीम लगी हुई है. लेकिन सफलता हासिल नहीं हो पा रही. सोमवार रात फिर बंगाल और झारखंड की ज्वाइंट टीम ने लुगाहारा गांव से हाथियों को खदेड़ने का काम किया है.

लुगाहारा गांव में 35 घर हैं. गांव के सभी लोग किसान हैं. कोई धान की खेती तो कोई सब्जी की खेती कर अपना गुजर बसर करते हैं. लेकिन बीते दो सालों से इस गांव के किसान हाथियों के तांडव से परेशान हैं. लॉकडाउन में सब्जी की खेती और धान की खेती को हाथियों ने रौंद दिया और खा गये. इस गांव में करीब 11 हाथियों का झुंड है.

लोगों का कहना है कि हाथियों को गांव से दस किलोमीटर दूर तक खदेड़ा दिया जाता है, लेकिन दूसरे दिन हाथी गांव आ धमकते हैं. जंगल के बीच गांव होने के कारण हाथियों का तांडव यहां जारी है.

जानकारी मिलने पर विधायक समीर महंती गांव पहुंचे और हाथियों के द्वारा किये गये नुकसान का जायजा लिया. उन्होंने डीएफओ को गांव में सोलरलाइट लगवाने का आग्रह किया.
लुगाहारा गांव के किसानों बताते हैं कि हाथियों के कारण अब कई किसान खेती करना छोड़ दिये हैं. लगातार दो साल से अपनी फसल को बर्बाद होता देख कर किसान हताश हैं.

हाथियों को खदेड़ने के लिये बंगाल से 30 और झारखंड से 30 वनकर्मी लगे हुए हैं. गांव के लोग मशाल लेकर ज्वाइंट टीम का साथ दे रहे हैं. रातभर पास के जंगल में हाथियों को भगाने का सिलसिला जारी रहता है.

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