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40 साल में 1500 लावारिस शवों का अंतिम संस्‍कार कर चुका है ये चायवाला

लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले मुरारी अग्रवाल टाटा में चाय की दुकान चलाते हैं

लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले मुरारी अग्रवाल टाटा में चाय की दुकान चलाते हैं

पिछले 40 सालों से मुरारी अग्रवाल लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं. मुरारी अग्रवाल की इस जुनून को देखते हुए इनके परिवार वालों ने भी इनका साथ देना शुरू कर दिया. पत्नी मालती अग्रवाल और पुत्र मनीष अग्रवाल भी अब इनके काम में इनको नहीं रोकते हैं .

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जमशेदपुर. समाज सेवा करने के लोगों के अपने अपने तरीके हैं, ऐसे में जमशेदपुर के एक चाय वाले ने समाज सेवा में मिसाल कायम की है. वो पिछले 40 सालों से लावारिश शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं. उनका मानना है कि इस दुनिया में जिन मृत शव का कोई परिजन नहीं होता है वो उस शव को अंतिम पड़ाव तक पहुंचाने में अपना योगदान देते हैं.

लावारिस लाश मिलती है तो फोन आता है

जमशेदपुर के रहने वाले मुरारी लाल अग्रवाल के सर पर ऐसी सनक सवार हुई कि वह लावारिस शवों को उनके अंतिम पड़ाव तक ले जाएंगे. बात 1979 की है जब मुरारी लाल अग्रवाल मात्र 18 साल के हुआ करते थे. उस समय से उनके मन में लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने की इच्छा हुई. फिर मुरारी अग्रवाल आसपास के इलाकों में यह पता करते थे कि कोई लावारिस व्यक्ति किसी कष्ट में तो नहीं है. मुरारी उन लावारिस व्यक्तियों की मदद भी करते थे. यदि स्टेशन या हॉस्पिटल में कोई लावारिस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती थी. तो मुरारी लाल अग्रवाल उस व्यक्ति का पूरा अंतिम संस्कार सनातन धर्म से करते थे. धीरे-धीरे जब इलाके में मुरारी लाल अग्रवाल की चर्चा होने लगी तो कहीं भी लावारिस लाश मिले तो लोग दूर-दूर से फोन करने लगे और मुरारी लाल अग्रवाल बिना समय गवाएं उस जगह पर पहुंच जाते थे और कानूनी प्रक्रिया होने के बाद उसके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी खुद ले लेते थे.

परिवार भी देता है साथ

जमशेदपुर के काशीडीह कुमारपारा चौक पर मुरारी लाल अग्रवाल की चाय और समोसे की छोटी सी दुकान है. इसी छोटी सी दुकान से इनके पूरे परिवार का भरण पोषण होता है. यही मुरारी लाल अग्रवाल अपने पूरे परिवार के साथ रहते हैं. पिछले 40 सालों से मुरारी अग्रवाल लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं. मुरारी अग्रवाल की इस जुनून को देखते हुए इनके परिवार वालों ने भी इनका साथ देना शुरू कर दिया. पत्नी मालती अग्रवाल और पुत्र मनीष अग्रवाल भी अब इनके काम में इनको नहीं रोकते हैं. पुत्र मनीष अग्रवाल भी जब बड़े हुए तो पिता को यह काम करते देखकर उनका हाथ बंटाने लगे.

अंतिम संस्कार करने वाले शवों का डिटेल दिखाखे मुरारी अग्रवाल


एक साथ 420 अस्थियों का बनारस में किया विसर्जन

जमशेदपुर के स्वर्ण रेखा नदी के बर्निग घाट पर जब लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करके अस्थि कलश को घाट पर ही छोड़ देते हैं. उसका विसर्जन नहीं करते हैं. तो मुरारी लाल अग्रवाल ने इसकी भी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली. 4 मार्च 2013 को जमशेदपुर के स्वर्णरेखा घाट से 420 अस्थि कलश को लेकर बनारस गए. बनारस में उन सभी अस्थि कलश को गंगा नदी में प्रवाहित किया.

मुरारी की डायरी में मरने वालों की तारीख

मुरारी अग्रवाल की हॉबी सिर्फ लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करना ही नहीं बल्कि लोगों की मृत्यु की तारीख को भी सहेज कर रखने का है. जब भी देश में किसी भी व्यक्ति की मौत होती है और यह जानकारी मुरारी लाल अग्रवाल को मिलती है तो वह उस तारीख को अपनी डायरी में लिख लेते हैं. मुरारी बताते हैं कि पिछले 40 सालों से वह इस डायरी को सहेजते और अपडेट करते आ रहे हैं. उनकी डायरी में हर उस व्यक्ति की मौत की तारीख लिखी हुई है जब उक्त व्यक्ति की मौत हुई थी. उनकी डायरी में अबुल कलाम से लेकर अभिनेत्री श्रीदेवी की भी अंतिम तारीख और मरने की जगह लिखी हुई है. वहीं बिहार के नेता लालमुनि चौबे की भी मौत की तारीख लिखी हुई है.

बेटे की शादी को छोड़ गए थे अंतिम संस्कार करने

मुरारी लाल अग्रवाल इस काम में इस तरह से मशगुल रहते हैं कि उन्हें अपने परिवार की भी चिंता भी नहीं होती है. पुत्र मनीष बताते हैं कि जब उनकी शादी हो रही थी तो उनके पिता मुरारी लाल अग्रवाल को पता चला की हॉस्पिटल में किसी की मौत हुई है और उसका कोई नहीं है. मुरारी अपने बेटे की शादी को छोड़कर हॉस्पिटल चले गए. उसकी पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की. फिर वह शादी में लौटे. लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार करने के वक्त मुरारी कोई भी मुहूर्त नहीं देखते हैं. कोई भी शुभ लाभ नहीं देखते हैं . घर में कोई भी मंगल कार्य हो, वह पहले अपने इस काम को करते हैं. आसपास के लोग बताते हैं की मुरारी ने इन 40 सालों में तकरीबन 15 सौ से ज्यादा लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार किया है .मुरारी के पास 12 सौ लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार की तस्वीरें भी मौजूद हैं.

सामाजिक कामों में भी आगे रहते है मुरारी

लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के अलावा मुरारी लाल अग्रवाल सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं. जमशेदपुर में जब कभी वाहनों की बड़ी जाम लग जाती है तो पूरे परिवार के साथ यह सड़क पर उतर जाते हैं और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने लगते हैं. वही दुर्गा पूजा के समय लगे जाम को हटाने में जो भी पुलिसकर्मी लगे रहते हैं उनके चाय नाश्ता की व्यवस्था मुरारी लाल अग्रवाल करते हैं. मुरारीलाल बताते हैं उन्हें ऐसा करके बहुत ही सुकून मिलता है वह बहुत ही खुश रहते हैं.

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