तबरेज मामले में मुआवजे के बाद मॉब लिंचिंग के एक अन्य पीड़ित परिवार में जगी आस

जमशेदपुर मॉब लिंचिंग के पीड़ित परिवार का कहना है कि मॉब लिंचिंग को धर्म के चश्मे से देखकर बवाल न किया जाए. पीड़ितों परिवारों को फास्ट ट्रैक कोर्ट या सीबीआई के माध्यम से न्याय दिलाया जाए.

Anni Amrita | News18 Jharkhand
Updated: July 8, 2019, 10:06 PM IST
तबरेज मामले में मुआवजे के बाद मॉब लिंचिंग के एक अन्य पीड़ित परिवार में जगी आस
नागाडीह मॉब लिंचिंग में कुंती देवी के बेटों, बेटों के दोस्त और उनकी सास की हत्या कर दी गई.
Anni Amrita | News18 Jharkhand
Updated: July 8, 2019, 10:06 PM IST
मॉब लिंचिंग को धर्म के चश्मे से देखकर बवाल न किया जाए. मॉब लिचिंग के शिकार हुए लोगों के परिजनों को फास्ट ट्रैक कोर्ट या सीबीआई के माध्यम से न्याय दिलाया जाए. ये कहना है जमशेदपुर के नागाडीह मॉब लिंचिंग कांड में कई अपनों को गंवा चुके एक ऐसे परिवार का जिसे सत्ता, राजनीति और समाज सभी ने भुला दिया. इस परिवार के दो बेटे, एक दादी और बेटों के दोस्त इन सबकी उन्मादी भीड़ ने पीट&पीट कर हत्या कर दी थी. इस दिल दहला देनेवाली घटना के दो साल बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को नहीं मिल पाया है.

कुंती देवी के 2 बेटों, सास और बेटों के दोस्त की पीटकर हत्या कर दी गई

अगर सरायकेला के तबरेज के लिए सबको दर्द हो सकता है तो फिर इस कुंती देवी के लिए क्यों नहीं. कुंती देवी ने मॉब लिचिंग कांड 18 मई 2017 को नागाडीह में अपने दो बेटों गौतम वर्मा, विकास वर्मा, सास रामसखी देवी और बेटों के दोस्त गंगेश गुप्ता को खो दिया. बागबेड़ा थाना क्षेत्र में बच्चा चोर के अफवाह में उन्मादी भीड़ ने इन सबकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. दिल दहला देनेवाली इस घटना का वीडियो वायरल हुआ था. उस वीडियो में पुलिस की मौजूदगी में भीड़ पिटाई कर रही थी. दादी अपने पोतों को छोड़ देने की गुहार लगा रही थी. लेकिन भीड़ ने दादी के सिर पर भी वार किया. जहां दोनों पोते अपने दोस्त समेत घटनास्थल नागाडीह गांव में ही मारे गए, वहीं दादी एक महीने तक जीवन औऱ मौत से जूझते हुए चल बसी.

सरकार ने नहीं ली परिवार की सुध

एक परिवार कई सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया गया. लेकिन इस परिवार को कोई मदद भी नहीं मिली. परिवार की बेटी को नौकरी दिए जाने की बात थी, लेकिन सबकुछ भुला दिया गया. सरायकेला के तबरेज की पत्नी को छप्पर फाड़कर मिली आर्थिक मदद से इस परिवार को कोई दिक्कत नहीं है. दुख इस बात का है कि सरकार ने इस परिवार की सुध नहीं ली. यह परिवार सीबीआई जांच की गुहार लगा रहा है.

पीड़ित परिवार के सदस्य ने मॉब लिंचिंग को राजनीति बताया
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इस परिवार को दुख इस बात का है कि मॉब लिंचिंग को धर्म के चश्मे से देखा जा रहा है. इसीलिए कई पीड़ित परिवारों को सरकार और सिसायत दोनों भूल चुकी है. घटना के चश्मदीद औऱ मृतक के भाई उत्तम वर्मा का साफ कहना है कि मॉब लिंचिंग दरअसल एक राजनीति है. इसको लेकर सत्ता और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं. लेकिन सभी मिले हुए हैं और जनता को बेवकूफ बनाकर वोट बैंक की राजनीति में लिप्त हैं.

नागाडीह मॉब लिंचिंग के 9 नामजद अभी भी फरार

बता दें कि नागाडीह कांड में अब तक 9 नामजद फरार हैं. मामला अदालत में लंबित है और न्याय प्रक्रिया  धीमी रफ्तार की भेंट चढ़ा हुआ है. यही वजह है कि पीड़ित परिवार सीबीआई जांच के लिए पीएम से लेकर गृह मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन तक गुहार लगा चुका है. सवाल ये है कि एक तरफ रामगढ़ के मामले को लेकर फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन हो जाता है औऱ सजा भी हो जाती है. वहीं दूसरी तरफ एक परिवार का सफाया हो जाता है, लेकिन क्या सत्ता औऱ क्या विपक्ष किसी को दुख नहीं होता. कोई मदद नहीं मिलती. इस घटना के बाद अदालत में मामले की गवाही की प्रक्रिया चल रही है और प्रशासनिक अधिकारी इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि, मॉब लिंचिंग को लेकर बने माहौल को देखते हुए कोई बयान देकर फंसना नहीं चाहता है.

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First published: July 8, 2019, 9:32 PM IST
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