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'सीएनटी-एसपीटी एक्ट मसले पर दबाव तो था, पर माना नहीं'

सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संसोधन मसले परपूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा पर  पिछले कुछ दिनों से उठ रहे सवालों पर आखिर मुंडा ने खुद चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि एक खास लॉबी मामले में दबाव दे रही थी, पर उन्होंने इस स्वीकृत कर दिया.

सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संसोधन मसले परपूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा पर पिछले कुछ दिनों से उठ रहे सवालों पर आखिर मुंडा ने खुद चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि एक खास लॉबी मामले में दबाव दे रही थी, पर उन्होंने इस स्वीकृत कर दिया.

सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संसोधन मसले परपूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा पर पिछले कुछ दिनों से उठ रहे सवालों पर आखिर मुंडा ...अधिक पढ़ें

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    सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संसोधन मसले पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा पर  पिछले कुछ दिनों से उठ रहे सवालों पर आखिर मुंडा ने खुद चुप्पी तोड़ी है.  जमशेदपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि एक खास लॉबी मामले में दबाव दे रही थी, पर उन्होंने इस स्वीकृत कर दिया.

    क्या है मामला

    पिछले कुछ दिनों से अखबारों में खबर आ रही थी कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संसोधन का मसौदा अर्जुन मुंडा के शासनकाल में ही बन गया था. पूर्व सीएम ने कहा कि यह खबर सही है. पर जिस किसी ने भी इस खबर को उछाला है, उसने यह बताने से परहेज किया है कि हमने इसकी मंजूरी नहीं दी थी.

    खास लाॅबी दे रही थी दबाव

    अर्जु मुंडा ने कहा कि सीएनटी एसपीटी एक्ट में संसोधन के लिए एक खास लॉबी दवाब दे रही थी.  कहा कि यह वही लॉबी थी जिसे इसमें संसोधन करने पर लाभ मिलने वाला था. पर बात असंवैधानिक होने की वजह से  उन्होंने इसे माना नहीं.  मामले को टीएसी के पास भेज दिया था.

    हाई कोर्ट का था फैसला

    मुंडा ने कहा कि उन दिनों हाई कोर्ट का फैसला आया था, जिसमें कहा गया था कि ट्राइबल ही नहीं, ओबीसी की जमीन भी ट्रांसफर नहीं की जा सकती. इसके बाद सीएमटी एसपीटी एक्ट पर संसोधन करने का कोई सवाल ही नहीं था.अर्जुन मुंडा ने मांग की कि सरकार को मामले में स्पष्ट करना चाहिए कि संसोधन होने से किसे लाभ मिलेगा.

     

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