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दुमका जेल में बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह का छूटना हुआ मुश्किल, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी ज़मानत

दुमका जेल में बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह का छूटना हुआ मुश्किल, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी ज़मानत

बिहार-झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह.

बिहार-झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह.

अपहरण और हत्या के कई संगीन मामलों के आरोपी अखिलेश सिंह को 2017 में हरियाणा के गुरुग्राम से पुलिस मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया था, तबसे वह झारखंड की दुमका जेल में है. हाई कोर्ट भी उसे ज़मानत से इनकार कर चुका है.

    रिपोर्ट- अभिनव कुमार

    जमशेदपुर. जेलर उमाशंकर पांडेय की हत्या के मामले में सज़ायाफ्ता गैंगस्टर अखिलेश सिंह की अर्जी सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन और बीआर गवई की खंडपीठ ने खारिज कर दी. अर्जी पर नौ अगस्त को न्यायालय में सुनवाई हुई थी. इसके साथ ही उसका जेल से निकलना अब मुश्किल हो गया है. अखिलेश की ओर से अपील अर्जी पर महेश जेठमलानी, कृष्णा पाल मावी, एमए नियाजी समेत 10 वकीलों ने बहस की. अदालत ने अपील को तात्कालिक रूप से स्थगित किया, जबकि इस मामले में नवंबर में अंतिम फैसला लिया जाएगा.

    इससे पहले झारखंड उच्च न्यायालय से 1 मई 2019 को अपील अर्जी खारिज हो चुकी है. अखिलेश सिंह वर्तमान में झारखंड के दुमका जेल में है. झारखंड उच्च न्यायालय ने ट्रांसपोर्टर उपेंद्र सिंह की हत्या मामले में जमानत खारिज करते हुए स्पष्ट कहा था कि अभियुक्त को ज़मानत नहीं दी जा सकती. अखिलेश सिंह के खिलाफ 58 आपराधिक मामले दर्ज हैं. 20 मामलों में वह बरी हो चुका है. जिस मामले में ज़मानत अर्ज़ी दाखिल की गई थी, वह संगीन जुर्म माना गया था.

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    क्या था जेलर हत्याकांड?
    जमशेदपुर के साकची जेल के जेलर उमाशंकर पांडेय की हत्या 12 मार्च 2002 को जेल परिसर आवास में घुसकर अखिलेश सिंह और संतोष पाठक ने की थी. भीड़ ने संतोष पाठक को पीट-पीटकर मार डाला था जबकि अखिलेश सिंह मौके से भागने में सफल रहा था. हत्याकांड में सिंह को आजीवन कारावास की सज़ा तीन जनवरी 2006 को जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय ने सुनाई थी. 2007 में मां की इलाज के लिए सिंह को न्यायालय ने पेरोल दिया था और तबसे वह जेल आता-जाता रहा. पेरोल खत्म होने पर भी वह उपस्थित नहीं हुआ था.

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    जेलर हत्याकांड में सज़ायाफ्ता गैंगस्टर अखिलेश सिंह कई बार फरार हो चुका है.

    फरारी के बाद उसे जमशेदपुर पुलिस ने नोएडा से 2011 को गिरफ्तार किया था. कुछ सालों तक जेल में रहने के बाद वह ज़मानत पर जेल से बाहर हुआ था. इस बीच 30 नवंबर 2016 को जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय के बार भवन में उपेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में भी सिंह समेत अन्य पर मामला दर्ज किया गया था.

    कितना कुख्यात है गैंगस्टर अखिलेश सिंह?
    जुगसलाई निवासी ओम प्रकाश काबरा का अपहरण 28 जुलाई 2001 में सिंह ने किया था. काफी दबाव के बाद बक्सर से काबरा को छोड़ दिया गया था. 10 अगस्त 2001 को काबरा के अपहरण मामले में अदालत में आत्मसमर्पण समर्पण करने के बाद 18 जनवरी 2002 को वह पेशी के दौरान चकमा देकर भाग निकला था. सिंह की फरारी के दौरान काबरा की हत्या नवंबर 2002 में साकची में कर दी गई. पहली बार पुलिस ने उसे बिहार के बक्सर के नगवा धनंजयपुर पैतृक आवास से 2004 से गिरफ्तार किया था.

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    कुछ साल जेल में रहने के बाद पेरोल पर वह 2007 में रिहा हुआ. फिर लंबी फरारी के बाद नोएडा से 2011 में जमशेदपुर पुलिस के हत्थे चढ़ा. अप्रैल 2015 में जेल से वह रिहा हआ. फरारी के दौरान ही उस पर अमित राय पर फायरिंग, अमित राय की हत्या और उपेंद्र सिंह की हत्या किए जाने के आरोप लगे.

    Tags: Crime News, Gangsters and criminals, Jharkhand news

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