जमशेदपुर शहर के नामकरण के सौ साल पूरे, उपराष्ट्रपति ने जारी किया डाक टिकट
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जमशेदपुर शहर के नामकरण के सौ साल पूरे, उपराष्ट्रपति ने जारी किया डाक टिकट
जमशेदपुर शहर के नामकरण के सौ साल पूरे होने पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने डाक टिकट जारी किया

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कभी-कभी दूरगामी हित को देखते हुए कड़े फैसले लेने पड़ते हैं. इसके लिए उन्होंने जीएसटी का उदाहरण दिया. लोकतंत्र में विरोध को सामान्य बताते हुए हिंसा की आलोचना की.

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जमशेदपुर. स्मार्ट सिटी की बात हो या किसी अन्य योजना को अमलीजामा पहनाने की. इसके लिए ऑपरेशन जरूरी है और ऑपरेशन के लिए जनता का कोऑपरेशन चाहिए, नहीं तो परिणाम सेपरेशन ही होगा. कुछ इसी चुटीले अंदाज में बड़े मुद्दों पर अपनी बात उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू (Venkaiah Naidu) ने रखी. जमशेदपुर शहर (Jamshedpur City) के नामकरण के सौ साल पूरे होने पर टाटा स्टील (Tata Steel) और राज्य सरकार की ओर से शताब्दी समारोह आयोजित की गई. इसमें बतौर मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति शरीक हुए. इस दौरान उन्होंने टाटा स्टील और जमशेदपुर पर आधारित डाक टिकट (Postal Stamp) का विमोचन किया. साथ ही जमशेदपुर पर आधारित कॉफी टेबल बुक का भी लोकार्पण किया.

जमशेदपुर शहर के नामकरण के सौ साल पूरे

जमशेदपुर शहर के नामकरण के सौ साल हो गए हैं. 1907 में जब यहां टाटा स्टील की स्थापना हुई, तब ये इलाका कालीमाटी के नाम से जाना जाता था. 1919 में इसका नाम जमशेदपुर पड़ा. टाटा स्टील जमशेदपुर शहर को लेकर स्थापना शताब्दी वर्ष मान रही है. इसी कड़ी में जमशेदपुर पर आधारित डाक टिकट और कॉफी टेबुल बुक का सोमवार को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने टाटा ऑडिटोरियम में विमोचन किया. इस मौके पर राज्यपाल द्रौपदी मूर्मू, मंत्री चंपई सोरेन, बीजेपी सांसद विद्युतवरण महतो, टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेन्द्रन और डाक विभाग के पदाधिकारीगण मौजूद थे.



उपराष्ट्रपति ने की टाटा की प्रशंसा 



कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने एथिक्स और कार्यसंस्कृति के मामले में उच्चस्तरीय मापदंड अपनाने को लिए टाटा घराने की पुरजोर प्रशंसा की और जमशेदपुर की हरियाली का भी बखान किया. उन्होंने चुटीले अंदाज में जंक फूड पर व्यंगय कसते हुए कहा कि इस्टैंट फूड मतलब कॉन्टैंट डीजीज, लोगों को ऐसे फास्ट फूड से दूर रहना चाहिए.

'आतंक का कोई धर्म नहीं'

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कभी-कभी दूरगामी हित को देखते हुए कड़े फैसले लेने पड़ते हैं. इसके लिए उन्होंने जीएसटी का उदाहरण दिया. लोकतंत्र में विरोध को सामान्य बताते हुए हिंसा की आलोचना की. साथ ही जाति, धर्म को लेकर विभेद की राजनीति को गलत बताया. और कहा कि आतंक का कोई धर्म नहीं है. पूरी दुनिया इससे पीड़ित है. सबको एकसाथ मिलकर इसका मुकाबला करना होगा.

रिपोर्ट- अन्नी अमृता

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First published: February 17, 2020, 4:35 PM IST
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