जामताड़ा का करमाटाड़: साइबर अपराध के लिए जितना बदनाम, आम के लिए उतना ही फेमस

करमाटाड़ आम के लिए जितना फेमस है, उतना ही साइबर अपराध के लिए बदनाम

Jamtara News: पंडित ईश्वर चन्द्र विद्यासागर की कर्मभूमि करमाटाड़ आम के लिए ब्रिटिश जमाने से प्रसिद्ध रहा है. अंग्रेजों के शासन काल से ही यहां बड़े-बड़े आम के बगीचे मौजूद हैं.

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    रिपोर्ट- सुमन भट्टाचार्य

    जामताड़ा. साइबर अपराध (Cyber Crime) के कारण देशभर में बदनाम झारखंड के जामताड़ा जिले के करमाटांड़ प्रखंड में इस बार आम (Mango) का बंपर उत्पादन हुआ है. करमाटांड़ प्रखंड में करीब एक दर्जन से अधिक आम के बगीचे हैं. यहां के आम रांची के अलावा पटना, मुंबई और कोलकाता तक भेजे जाते हैं. यहां का मालदा आम काफी विख्यात है. अंग्रेजों के जमाने से ही करमाटांड़ के आम के लिए प्रसिद्ध रहा है.

    करमाटांड़ के आम बागान मालिक प्रदीप मुखर्जी उर्फ टिंकू ने बताया कि उनके बागान में अभी 70 किस्म के आम के पेड़ हैं. सालाना वह आम बेचकर 2 से ढाई लाख रुपए कमा लेते हैं. इस बार लॉकडाउन के कारण बिक्री प्रभावित हुई है. लेकिन स्थानीय स्तर पर आम की बिक्री हो रही है. 30 से 40 रुपये किलो की दर से आम बेच रहे हैं.

    बता दें कि पंडित ईश्वर चन्द्र विद्यासागर की कर्मभूमि करमाटाड़ आम के लिए ब्रिटिश जमाने से काफी प्रसिद्ध है. अंग्रेजों के शासन काल से ही यहां बड़े-बड़े आम के बगीचे हैं. यहां के आम के शौकिन मुंबई, कोलकाता और पटना तक में हैं, जो आम के सीजन में यहां आकर आम खरीद घर ले जाते हैं. या फिर ऑनलाइन मंगवाते हैं.

    बगान मालिक प्रदीप मुखर्जी की माने तो प्रत्येक वर्ष एक बगान से करीब सौ क्विटल आम का उत्पादन होता है. ये बगान उन्हें बिरासत में मिला, जिससे उन जैसे बगान मालिक को सालाना ढाई-तीन लाख कमाई होती है. इससे उनका परिवार आराम से चलता है.

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