ईंट भट्ठा छोड़ लगाया आम बगान, अब सालाना लाखों की कमाई कर रहा जामताड़ा का ये किसान

निर्मल माजी अब दूसरे किसानों को भी आम बगान लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

निर्मल माजी अब दूसरे किसानों को भी आम बगान लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

Jamtara News: किसान निर्मल माजी आम बेचकर सालाना पांच से छह लाख रुपये की आमदनी कर रहे हैं. उसने बताया कि जिस पथरीली जमीन को बेकार समझ कर उसपर ईंट भट्ठा लगाने की तैयार थी. आज वही जमीन सोना उगल रही है.

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रिपोर्ट- सुमन भट्टाचार्य

जामताड़ा. राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) ने जामताड़ा के एक किसान की तकदीर बदल कर रख दी. जिले के नाला प्रखंड के मथुरा गांव निवासी किसान निर्मल माजी ने लगभग 8 एकड़ पथरीली जमीन पर वर्ष 2009-10 में विभिन्न प्रजाति के लगभग 1000 आम (Mango) के पौधे लगाए थे. यहीं से सफर शुरू हुआ और उसके बाद हर साल पेड़ों की संख्या बढ़ती गई. आज यह आम का बागान पूरे 8 एकड़ में फैलकर विशाल घने बागान के रूप में तब्दील हो चुका है. बागान में सभी आम के पेड़ फल दे रहे हैं.

पिछले 2 वर्षों से आम बेचकर निर्मल सालाना पांच से छह लाख रुपये की आमदनी कर रहे हैं. निर्मल ने बताया कि जिस पथरीली जमीन को बेकार समझ कर उसपर ईंट भट्ठा लगाने की तैयार थी. इसलिए जहां-तहां गड्ढा कर दिया था, आज वही जमीन सोना उगल रही है.

निर्मल माजी के बगीचा के आम को जामताड़ा, दुमका, धनबाद, बोकारो, रांची के अलावा पश्चिम बंगाल के भी व्यापारी खरीद कर ले जाते हैं. वहीं इस लॉकडाउन में जहां अन्य कारोबार पर मंदी का असर है, वहीं निर्मल आम बेचकर अच्छी कमाई कर रहे है.

झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल के कारोबारी निर्मल से आम खरीदते हैं.
झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल के कारोबारी निर्मल से आम खरीदते हैं.

निर्मल ने अपनी दूसरी पथरीली जमीनों पर भी इस वर्ष आम के सैंकड़ों पौधे लगवाए हैं. उसका प्रयास है कि लगभग 20 एकड़ में वह आम तथा अन्य फलों का बागवानी तैयार करे. यही नहीं आसपास के किसानों को भी वह बागवानी मिशन के तहत आम की खेती करने के लिए जागरूक कर रहे हैं. समय- समय पर जिले के उपायुक्त सहित अन्य आलाधिकारी भी बागान का जायजा लेने पहुंचते हैं और निर्मल के प्रयासों की सराहना करते हैं.

बहरहाल जाहिर है कि अगर कड़ी मेहनत और लगन से काम की जाय तो बंजर पथरीली जमीन भी सोना उगलने लगती है. किसान निर्मल माजी ने इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है. व्यापक पैमाने पर आम का उत्पादन कर आमदनी के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन की दिशा में भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.

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