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जयंत सिन्हा का झारखंड सरकार पर निशाना, बोले- 'अयोग्य हेमंत सरकार' ने खाली किया राज्य का खजाना

बीजेपी सांसद जयंत सिन्हा ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है.
बीजेपी सांसद जयंत सिन्हा ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है.

बीजेपी (BJP) सांसद जयंत सिन्हा (Jayant Sinha) ने हेमंत सोरेन (Hemant soren) सरकार पर राज्य का खजाना खाली करने का आरोप लगया है. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की अयोग्यता और गलत नीतियों (Wrong policies) के कारण ऐसा हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 26, 2020, 12:26 AM IST
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रांची. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा (Jayant Sinha) ने कांग्रेस-झामुमो की झारखंड सरकार (Government of Jharkhand) को ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ बताते हुए मंगलवार को कहा कि दिशा-विहीन हेमंत सोरेन (Hemant Soren) सरकार ने खजाना खाली कर दिया है, जिससे राज्य की जनता त्रस्त है. हजारीबाग (Hazaribagh) के सांसद सिन्हा ने एक बयान में कहा, ‘झामुमो एवं कांग्रेस की सरकार अपनी अयोग्यता के कारण विफल है.’

सिन्हा ने कहा कि वर्ष 2020-21 के बजट में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में 29.8 प्रतिशत की कमी आई और यह दर्शाता है कि अस्पतालों, सड़कों, पुलों जैसी संपत्तियों के निर्माण पर कम खर्च किया गया. उन्होंने दावा किया कि राज्य में वर्तमान वित्त वर्ष में ग्रामीण विकास (45 प्रतिशत), सिंचाई (45 प्रतिशत) और परिवहन (27 प्रतिशत कमी) जैसे क्षेत्रों में आवंटन में भारी कमी देखी गई है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बीच जहां स्वास्थ्य सुविधाओं एवं बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना चाहिए, वहां पूंजीगत व्ययय को कम कर चल रही परियोजनाओं को भी लंबित छोड़ रही है.

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सिन्हा ने कहा कि केंद्र से आर्थिक सहयोग नहीं मिलने का राज्य सरकार का आरोप भी गलत है. सांसद ने कहा कि बजट में केंद्रीय हिस्सेदारी जहां पहले 23 हजार करोड़ हुआ करती थी, वहीं इस बार यह हिस्सेदारी दोगुनी होकर 41 हजार करोड़ हो गई है. 1400 करोड़ रुपये डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (डीएमएफ) से भी मिले हैं, जो राशि पहले नहीं मिलती थी. 15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड को मिलनेवाली राशि में भी 26 फीसद की वृद्धि हुई है, जिससे 20,593 करोड़ की बजाय राज्य सरकार को अब 25,980 करोड़ रुपये मिल रहे हैं.
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के खराब बजट से कैपेक्स 29.8 फीसद घटा और राजस्व व्यय 10.6 फीसद बढ़ा है. उधार में 8.3 फीसद की कमी हुई है, लेकिन इस सरकार द्वारा उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग नहीं किया गया. कोरोना काल में जहां स्वास्थ्य सुविधाओं और आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करना चाहिए था, वहीं सरकार इसके विपरीत कैपेक्स को कम कर चल रही परियोजनाओं को भी लंबित छोड़ रही है. पलामू, हजारीबाग और दुमका के तीनों नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण भी बंद हो गया है. पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि अन्य राज्यों ने जहां कोरोना के दौरान विशेष संसाधन जुटाए, वहीं झारखंड सरकार इसमें भी विफल रही.



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भारत सरकार ने कोरोना काल में राज्यों के समर्थन हेतु वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए जीएसडीपी तीन फीसद से पांच फीसद तक कर राज्यों के लिए उधार सीमा बढ़ा दी है. ऐसे में राज्य सरकार को महामारी की आपदा को अवसर में बदलते हुए वित्तीय क्षेत्र में विस्तार और प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित करना चाहिए. इस मौके पर प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव और मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक भी उपस्थित थे.
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