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झारखंड विधानसभा चुनाव: अर्जुन मुंडा के केंद्रीय मंत्री बनने से रघुवर दास की राह आसान हुई?

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: June 6, 2019, 1:14 PM IST
झारखंड विधानसभा चुनाव: अर्जुन मुंडा के केंद्रीय मंत्री बनने से रघुवर दास की राह आसान हुई?
झारखंड के सीएम रघुवर दास के नेतृत्व में ही आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी?

झारखंड उन राज्यों में से एक राज्य है, जहां अगले आठ महीनों में चुनाव होने वाले हैं. हालांकि, तमाम कयासों को नकारते हुए बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है.

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देश में लोकसभा चुनाव के बाद अब सबकी निगाहें चार राज्यों की विधानसभा चुनावों पर आकर टिक गई हैं. अगले 8-9 महीनों के अंदर चार राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं. दिल्ली, हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र वे राज्य हैं, जहां पर अगले कुछ महीनों में विधानसभा के चुनाव होंगे. दिल्ली को छोड़कर सभी राज्य इस समय बीजेपी के कब्जे में है. ऐसे में माना जा रहा है कि झारखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा में इस बार बीजेपी की प्रतिष्ठा दांव पर होगी.

हालांकि, लोकसभा चुनाव के नतीजों की मानें तो इन चारों राज्यों में बीजेपी का सरकार बनना तय माना जा रहा है. लेकिन, विधानसभा और लोकसभा के चुनाव अलग-अलग मुद्दे पर लड़े जाते हैं और हाल ही में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव नतीजों ने इस बात पर मुहर भी लगा दी है.

बीजेपी की दावेदारी काफी मजबूत?

बता दें कि झारखंड उन राज्यों में से एक राज्य है, जहां इस बार बीजेपी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. हालांकि, तमाम कयासों को नकारते हुए बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है. बीजेपी ने 11 और उसकी सहयोगी आजसू ने इस चुनाव में 1 सीट यानी कुल 14 में से 12 सीटों पर जीत दर्ज की है. महागठबंधन के खाते में सिर्फ दो सीट नसीब हुई. इस लिहाज से बीजेपी की दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है.

झारखंड के सीएम रघुवर दास दिल्ली में पीएम मोदी से मिलते हुए


लेकिन, इसके बावजूद जानकार विधानसभा और लोकसभा चुनावों को अलग-अलग नजरिए से देखते हैं. इसके कई कारण हैं. पहला, पार्टी के अंदर गुटबाजी से भी चुनाव परिणाम पर असर पड़ता है. दूसरा, स्थानीय स्तर के मुद्दों की भूमिका काफी अहम हो जाती है. तीसरा, जरूरी नहीं है कि मोदी मैजिक विधानसभा चुनाव में भी चले और चौथा, रघुवर दास सरकार के पांच साल के कार्यकाल के कारण एंटी इंकंबैंसी फैक्टर. इस लिहाज से देखें तो झारखंड के सीएम रघुवर दास के लिए रास्ता उतना आसान नहीं है, जितना दिखाई दे रहा है.

झारखंड में इस बार का लोकसभा का परिणाम काफी चौकाने वाला रहा. जेएमएम के गढ़ में भी बीजेपी ने सेंध लगा दी है. दुमका, जो जेएमएम का परंपरागत सीट रही है और जेएमएम सुप्रोमो शिबू सोरेन (गुरु जी) की सीट है, उस सीट पर भी पार्टी की करारी हार हुई है.
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आदिवासी वोटबैंक पर किसकी पकड़ मजबूत?

माना जाता रहा है कि संथाल में जिस पार्टी का कब्जा होता है राज्य में आदिवासी का वही सबसे बड़ा नेता होता है. इस लिहाज से देखें तो रघुवर दास बड़े नेता हैं, लेकिन वह गैर आदिवासी हैं तो लोकसभा में जीत का सारा क्रेडिट मोदी को दिया जा रहा है. बीजेपी ने पहली बार जेएमएम के गढ़ में जाकर हराया है. इस लिहाज से लगता है कि लोकसभा चुनाव में जेएमएम की आदिवासियों पर पकड़ काफी कमजोर हुई है.

झारखंड के तीन बार के सीएम और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का फाइल फोटो


ये कुछ बातें राज्य के सीएम रघुवर दास के अनुकुल थीं. अब कुछ ऐसी बातें हैं जो रघुवर दास के विरोध में जाती हैं. पिछले चार सालों में कई बार रघुवर दास के विरोध में पार्टी के अंदर से आवाजें उठीं हैं. हर बार आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद मामला दबा दिया जाता रहा है. विधानसभा चुनाव में ये बातें बीजेपी के विरोध में जा सकती है?

आदिवासी और गैरआदिवासी सीएम का मद्दा बनेगा?

झारखंड एक आदिवासी राज्य है और रघुवर दास पहले ऐसे सीएम हैं जो गैरआदिवासी हैं. इस लिहाज से बीजेपी के अंदर से ही एक आदिवासी सीएम की मांग लगातार उठती रही है. इस बार अगर रघुवर दास ही सीएम चेहरा होंगे तो विपक्षी पार्टियां आदिवासी और गैरआदिवासी का मुद्दा बना कर बीजेपी के घेर सकती हैं.

जानकारों की मानें तो बीजेपी सरकार ने पिछले दिनों कुछ ऐसे कानून पास किए हैं, जिससे ईसाई मिशनरीज में गुस्सा है. धर्मांतरण बिल लोकसभा चुनाव के वक्त भी एक बड़ा मुद्दा था, जिसका नतीजा था कि खूंटी में अर्जुन मुंडा हारते-हारते किसी तरह जीत गए. चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद भी यह मुद्दा फिर से गर्मा सकता है. भले ही मोदी लहर में धर्यमांतरण का मुद्दा गौन हो गया था, लेकिन विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इससे काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

पिछले चार-पांच साल से राज्य के तीन बार के सीएम अर्जुन मुंडा अज्ञातवास में चल रहे थे. इस लोकसभा चुनाव में अर्जुन मुंडा को खूंटी सीट से मौजूदा सासंद करिया मुंडा का टिकट काट कर लड़ाया गया. अर्जुन मुंडा किसी तरह चुनाव जीत भी गए और केंद्र में मंत्री भी बन गए. ऐसे में एक बार फिर से सवाल उठ रहा है कि क्या अर्जुन मुंडा के केंद्र में मंत्री पद पाने के बाद राज्य में रघुवर दास को चुनौती मिल सकती है?

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पीएम मोदी एक कार्यक्रम में मंत्रणा करते हुए


अर्जुन मुंडा एक आदिवासी नेता हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में अर्जुन मुंडा बहुत मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे. इस वजह से वह सीएम पद की रेस से बाहर हो गए थे,  लेकिन इस बार परिस्थिति दूसरी बन गई है. अर्जुन मुंडा लोकसभा चुनाव जीते भी हैं और केंद्र में मंत्री भी बन गए हैं. ऐसे में बीजेपी अर्जुन मुंडा को नाराज नहीं कर सकती है.

एनडीए कितना मजबूत? 

अगर गठबंधन की बात करें तो बीजेपी काफी मजबूत दिख रही है. झारखंड में बीजेपी और आजसू का गठबंधन तय माना जा रहा है. वहीं जेएमएम, कांग्रेस, जेवीएम और आरजेडी को लेकर थोड़ा संशय के बादल मंडरा रहे हैं. अगर राज्य में महागठबंधन एक बार फिर से बनता है तो बीजेपी के लिए थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है.

झारखंड में विधानसभा की 81 सीटों पर चुनाव होती है जबकि एक सीट एंग्लो इंडियन के लिए नामित किया जाता है. 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 37 सीटें मिली थीं. बीजेपी ने आजसू से मिलकर सरकार बनाई थी. बाद में झारखंड विकास मोर्चा(जेवीएम) के 6 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे. बीजेपी को राज्य में इस समय 43 विधायक हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के 19 जबकि झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के पास आठ विधायक हैं. इस साल नवंबर-दिसंबर में चुनाव संभव है. बीजेपी ने इस बार विधानसभा चुनाव में अबकी बार 60 के पार का नारा दिया है.

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First published: June 6, 2019, 12:57 PM IST
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