केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर झारखंड का 34वां नेशनल गेम घोटाला
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केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर झारखंड का 34वां नेशनल गेम घोटाला
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इस घोटाले को कई बड़े सरकारी अधिकारियों के साथ खेल प्रशासन के कई बड़े अधिकारियों और कुछ केंद्रीय स्तर के नेताओं ने भी अंजाम दिया था.

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  • Last Updated: September 19, 2018, 11:04 AM IST
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर करीब आठ साल पुराना वो घोटाला आ गया है, जिसको कई लोग लगभग भूल चुके हैं. दरअसल झारखंड में हुए 34वें नेशनल गेम्स के अंतर्गत करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ था. झारखंड उस वक्त इस नेशनल स्तर के खेल की मेजबानी कर रहा था.

उसी वक्त टेंडर समिति के सदस्यों ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया था. इस घोटाले को कई बड़े सरकारी अधिकारियों के साथ खेल प्रशासन के कई बड़े अधिकारियों और कुछ केंद्रीय स्तर के नेताओं ने भी अंजाम दिया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए तफ्तीश का जिम्मा झारखंड की स्थानीय एसीबी यानी एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपा गया, लेकिन कोर्ट की फटकार के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ी है. लिहाजा अब इस मामले की तफ्तीश के लिए ईडी जल्द जुटने वाली है.

इसके लिए रांची स्थित ईडी की टीम अपने दिल्ली स्थित मुख्यालय के संपर्क में बनी हुई है. इस मामले में एसीबी के सूत्रों की मानें तो ईडी की टीम एसीबी के अधिकारियों से इस मामले से जुड़ींं जानकारियां जुटानी शुरू कर दी है. बताया जाता है कि अब मात्र औपचारिकता मात्र बाकी रह रही है. जल्द ही ईडी झारखंड के रांची में ही दर्ज एफआईआर को आधार बनाते हुए उस केस के टेकओवर करने वाली है और इस मामले से जुड़े कई लोगों के खिलाफ ठोस एक्शन लेने वाली है. ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करने वाली है. इससे आरोपियों की वो प्रॉप्रटी भी जब्त हो सकती है, जो इस घोटाले की रकम से बनाई गई है.



घोटाले की बात करें तो इस मामले को कई हाई प्रोफाइल लोगों ने मिलकर अंजाम दिया था. साल 2010 का ये मामला है, जिसकी जांच का जिम्‍मा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एसीबी को सौंपा गया था. इस मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश कलमाडी, आर.के. आनंद सहित झारखंड से जुड़े कई खेल अधिकारी नप सकते हैं. इस मामले में खेल सामाग्रियों की खरीद के लिए बनी टेंडर समिति के उन तमाम सदस्यों से भी पूछताछ की जाएगी, जो इस मामले से जुड़े हुए थे. इस मामले में एनजीओसी के पीसी मिश्रा और एसएम हासमी पर शिकंजा कस सकता है. आठ साल पुराने इस मामले में कई दस्तावेजों को घोटालेबाजों ने या तो हटा दिया है या कई दस्तावेजों की चोरी हो गई है.
(शंकर आनंद की रिपोर्ट)

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