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रांची में बेहद करीबी मुकाबले में जीते सीपी सिंह, महुआ मांझी को दूसरी बार हराया
Ranchi News in Hindi

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Updated: December 23, 2019, 8:41 PM IST
रांची में बेहद करीबी मुकाबले में जीते सीपी सिंह, महुआ मांझी को दूसरी बार हराया
दो दशक से ज्यादा समय से रांची में बीजेपी का झंडा बुलंद किए हुए हैं सीपी सिंह

रांची विधानसभा सीट पर बीजेपी का ही सबसे ज्यादा कब्जा रहा है और साल 1990 से लेकर अबतक बीजेपी इस सीट पर 6 मुकाबले जीत चुकी है

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  • Last Updated: December 23, 2019, 8:41 PM IST
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बिहार-झारखंड की राजनीति में कई दशकों का अनुभव समेटे सीपी सिंह इस बार भी रांची में विरोधियों पर भारी पड़े. सीपी सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी महुआ मांझी को लगातार दूसरी बार शिकस्त दी. इससे पहले  2014 के विधानसभा चुनाव में सीपी सिंह ने महुआ मांझी को 59 हज़ार वोटों से हराया था.

सीपी सिंह का पूरा नाम चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह है. वो साल 2014 में भी रांची विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे. उस वक्त महुआ मांझी को केवल 7,935 वोट मिले थे. सीपी सिंह को 64.4 प्रतिशत वोट मिले थे. साल 2009 के विधानसभा चुनाव में भी चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह इस सीट से विजय रहे थे. जबकि साल 2005 के विधानसभा चुनाव में भी सीपी सिंह इस सीट से विजयी हुए थे.

रांची विधानसभा सीट पर बीजेपी का ही सबसे ज्यादा कब्जा रहा है. साल 1990 से लेकर अबतक बीजेपी इस सीट पर 6 मुकाबले जीत चुकी है. बीजेपी उम्मीदवार रहे यशवंत सिन्हा और प्रकाश गुप्ता यहां से चुनाव जीत चुके हैं. जबकि सीपी सिंह रांची विधानसभा सीट से अबतक 5 बार चुनाव जीत चुके हैं. साल 1996 से लेकर अबतक सीपी सिंह रांची विधानसभा सीट से विधायक हैं. वो 1996, 2000,2005,20009 और 2014 में इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं.

चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह का जन्म 16 जनवरी 1956 को पलामू जिले के नवग्रह गांव में हुआ. उनके पिता का नाम जयमोहन सिंह और माता का नाम राजेश्वरी देवी है. नवग्रह गांव से प्रारम्भिक पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने रांची के स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की. रांची यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के दौरान वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े.

1975 में आपातकाल के समय इंदिरा सरकार की नीतियों का विरोध करने की वजह से उन्हें जेल जाना पड़ा और उन्हें हज़ारीबाग की जेल में 7 महीनों तक रखा गया. इसके बाद 1978 में छोटा नागपुर लॉ कॉलेज से उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की और 1982 में लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2 साल तक प्रैक्टिस की. लेकिन इमरजेंसी आंदोलन में युवा और तेज़तर्रार छात्र नेता के तौर अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर सीपी सिंह स्थानीय नेताओं की नज़रों में आ गए थे. 1978 में वो जनता पार्टी से जुड़ गए और फिर जनता पार्टी टूटने के बाद 1980 में वो बीजेपी से जुड़ गए. 1982 से 1996 तक वो रांची में बीजेपी की युवा इकाई के शीर्ष पद पर लगातार रहे. बिहार में बीजेपी के प्रचार-प्रसार और चुनावी राजनीति में सीपी सिंह ने बहुत मेहनत की जिसकी वजह से शीर्ष नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें रांची में बीजेपी का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया. साल 2010 में सीपी सिंह को झारखंड विधानसभा का स्पीकर नियुक्त किया गया था. फिलहाल, झारखंड में रघुवर प्रसाद सरकार में सीपी सिंह शहरी विकास, आवास और ट्रांसपोर्ट मंत्री हैं.

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First published: December 23, 2019, 8:41 PM IST
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