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बेटी निक्की प्रधान ओलंपिक में कर रही देश का झंडा बुलंद, पिता को कच्चे मकान में रहने का मलाल

निक्की प्रधान के पिता सोमा प्रधान ने बताया कि निक्की अब गांव की बजाय शहर में रहना चाहती है.

निक्की प्रधान के पिता सोमा प्रधान ने बताया कि निक्की अब गांव की बजाय शहर में रहना चाहती है.

Nikki Pradhan: खूंटी की सड़कों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स और कटआउट ये इशारा कर रहे हैं कि आज राष्ट्रीय खेल हॉकी की चर्चा देशभर में हो रही है. टीम इंडिया की मजबूत डिफेंडर निक्की प्रधान खूंटी की ही रहने वाली है.

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खूंटी. टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारतीय महिला हॉकी टीम (Indian women’s hockey team) की शानदार सफलता ने राष्ट्रीय खेल हॉकी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है. टीम में शामिल सभी बेटियों का गुणगान देश भर में किया जा रहा है. इन्हीं में एक खिलाड़ी है झारखंड के खूंटी की बेटी निक्की प्रधान (Nikki Pradhan).

खूंटी की सड़कों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स और कटआउट ये इशारा कर रहे हैं कि आज राष्ट्रीय खेल हॉकी की चर्चा देशभर में चारों तरफ है. जिस टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी को शुरुआत में तवज्जो नहीं दी जा रही थी, आज उसी टीम के गुणगान और हौसला अफजाई से खूंटी का हेसल गांव भी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है. टीम ऑफ इंडिया की मजबूत डिफेंडर निक्की प्रधान इसी गांव की रहने वाली है.

निक्की के पिता ने बताया कि गुल्ली डंडा खेलने वाली उनकी बेटी ने बचपन में हॉकी का स्टिक कब पकड़ लिया, पता ही नहीं चला. हालांकि पिता को दुनिया भर में नाम कमाने वाली अपनी बेटी पर गर्व है. लेकिन गांव में कच्चे घर में रहने का मलाल भी. पिता सोमा प्रधान ने राज्य सरकार से शहर में एक पक्के मकान की मांग की है. साथ ही हेसल गांव में एक भी खेल का मैदान नहीं होने पर दुख भी जताया है.

nikki pradhan

निक्की प्रधान दूसरी बार ओलंपिक खेल रही हैं.

निक्की के पिता सोमा प्रधान ने बताया कि निक्की अब गांव के बजाय शहर में रहना चाहती हैं. ताकि वह अपने खेल को लेकर बेहतर ढंग से प्रैक्टिस कर सके. क्योंकि गांव में मैदान और दूसरी सुविधाएं नहीं होने की वजह से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

छोटे शहर की बेटियों का दायरा और दुनिया उनकी मां तक ही सीमित होती है. लेकिन अपनी मां के आशीर्वाद से ही निक्की ने खूंटी के इस गांव से निकलकर दुनिया भर में अपने खेल का खूंटा गाड़ा है. निक्की की मां बताती हैं कि वह बचपन से ही तेजतर्रार और समझदार रही हैं. और शायद इसी का असर है कि वह टीम में अच्छे ढंग से एक मजबूत डिफेंडर की भूमिका निभा पाती है. निक्की की मां ने बताया कि निक्की गांव की बेटी है,इसलिए साग भात ही खाना ज्यादा पसंद करती है.

निक्की के माता-पिता के साथ ही गांव में रहने वाले उसके परिजन भी अपनी बेटी के खेल कौशल और दुनिया भर में हो रही उसके हुनर की चर्चा से खूशी से फुले नहीं समा रहे. सभी को उम्मीद है कि निक्की खेल के मैदान में विरोधी टीम को गोल करने का मौका नहीं देगी. और मौका मिलते ही गोल करने से चूकेगी भी नहीं.

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