झारखंड: विधवा पेंशन योजना का इन्हें नहीं मिल रहा लाभ, कुछ 20 साल से लगा रही चक्कर

सांकेतिक फोटो.

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झारखंड (Jharkhand) की हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Government) में भी राज्य की विधवा महिलाओं के हाथ खाली हैं. पेंशन की आस में ये महिलाएं दाने-दाने को मोहताज हैं

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रांची. झारखंड (Jharkhand) की हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Government) में भी राज्य की विधवा महिलाओं के हाथ खाली हैं. पेंशन की आस में ये महिलाएं दाने-दाने को मोहताज हैं. जीवन साथी ने तो कब का साथ छोड़ दिया था, पर सरकार साथ नहीं देगी ये कभी सोचा नहीं था. खूंटी जिले का शिलदा गांव में रहने वाली विधवा महिलाओं का दर्द भी कुछ ऐसा है. खूंटी जिले का आदिवासी बहुल शिलदा गांव. रांची-खूंटी सीमा पर बसे इस गांव की पहचान कभी उसकी संस्कृति और रहन-सहन को लेकर होती थी. मगर गुजरते समय के साथ इस गांव की पहचान अब विधवा महिलाओं के गांव के तौर पर होने लगी है.

किसी विधवा महिला के लिये अकेले जीवन गुजारना कितना मुश्किल होता है, कोई शिलदा की विधवा महिलाओं समझे. ना ही जीवन साथी का सहारा और ना ही जिंदा रहने का कोई आसरा. बच्चे अभी छोटे -छोटे है जिंदगी का संघर्ष इतना लंबा. सरकार जिस विधवा पेंशन का ढोल पिटती है, उसकी हकीकत की पड़ताल भी सरकार को धरातल पर जा कर करनी चाहिये. वीणा सरकार से पूछती है कि आखिर विधवा पेंशन का लाभ पाने के लिये और कितनी बार फार्म भरना होगा.

20 साल काट रही चक्कर

शिलदा गांव की जमुनी देवी 20 साल से सरकारी बाबू और राजनीति करने वाले नेताओं के चक्कर लगा रही है. पेंशन पाने को लेकर ना जाने कितनी बार फार्म भरने की प्रक्रिया को पूर्ण कर चुकी है. फिर भी आज तक ये महिलाएं पेंशन की हकदार नहीं बन सकी. हां ये बात जरूर है कि पेंशन दिलाने के नाम पर मुखिया से लेकर गांव के दलाल तक इन महिलाओं से पैसे एंठ चुके है. किसी ने विधवा पेंशन के नाम पर पांच सौ रुपये ले लिए तो किसी ने पक्के आवास दिलाने के नाम पर, मगर मिला आज तक कुछ भी नहीं.
आसान नहीं है योजनाओं का लाभ लेना

सरकार की योजनाओं का लाभ ले पाना इतना आसान नहीं है. शिलदा गांव इसका जीता जागता उदाहरण है. शिक्षित नहीं होने की वजह से इनमें से कई महिलाएं पेंशन पाने को लेकर सरकार की कागजी प्रक्रियाओं को पूर्ण नहीं कर पाती है . इनके पास अपने पति का मृत्यु प्रमाण पत्र भी नहीं है . जिन्होंने सरकार की सभी प्रक्रियाओं को पूरा भी किया वो भी आज दर-दर भटक रहे है .रघु मुंडा भी उनमें से एक है जो अपनी विधवा पुत्र वधु को आज तक पेंशन नहीं दिला पाए.

दूसरे गांवों का भी ये हाल



शिलदा झारखंड का एक मात्र गांव नहीं है , जहां सरकार की विकास योजनाओं का ये हाल हो. बल्कि राज्य में ऐसे अनगिनत गांव हैं, जहां के लोगों को महिलाओं को सरकार के द्वारा समय पर योजना का लाभ मिलने का इंतजार है. क्योंकि ये महिलाएं सरकार की योजनाओं का असली हकदार है और सरकार इनसे कोसों दूर खड़ी नजर आती है.

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