घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र खूंटी का इमली केक बाजार में मचा रहा धमाल, महिलाएं लिख रहीं नई इबारत

इमली केक तैयार करतीं खूंटी की महिलाएं

इमली केक तैयार करतीं खूंटी की महिलाएं

Khunti News: झारखंड का खूंटी जिला घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है. लेकिन सरकार की मदद से यहां की महिलाएं जिले की तकदीर बदल रही हैं. यहां का इमली केक बाजार में धमाल मचा रहा है.

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खूंटी. झारखंड में महिलाओं की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल रही है. ये बदलाव उनके स्वाबलंबन और आजीविका की कहानी को बयां कर रहा है. खूंटी की महिलाएं इन दिनों चर्चा में है. ये चर्चा उनके द्वारा तैयार किये जा रहे इमली केक को लेकर है. ग्रामीण विकास विभाग के पलाश ब्रांड के तहत तैयार इस प्रोडक्ट ने धमाल मचा दिया है.

झारखंड का खूंटी जिला देश के मानचित्र पर घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है. लेकिन आज इस नक्सल प्रभावित जिले की महिलाओं के जीवन में इमली ने बदलाव ला दिया है. बदलाव भी ऐसा वैसा नहीं, रोजगार से जुड़ा हुआ. पहले ये इमली 10 से 15 रुपया प्रति किलो की दर से महाजन खरीद लिया करते थे. महिला समूह से जुड़ने के बाद जब महिलाओं को इस बात का अंदाजा हुआ कि महाजन को इमली बेचने से ना पैसा सही मिल रहा और ना वजन, तब खुद का काम शुरू करने पर सहमति बनी.

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खूंटी के कालामाटी में महिला समूह के द्वारा इमली से रोजगार का रास्ता तलाशने की शुरुआत की गई. इस रोजगार में सबकी अपनी - अपनी भूमिका है. महिलाओं का एक समूह गांव में तैयार इमली को इकट्ठा करने का काम करती है. दूसरा समूह इसे काला माटी तक पहुंचाता है. तीसरा समूह इमली को छांटने, फिर उसे तोड़ने, फिर इमली का बीज निकालने और अंत में उसे पैकेजिंग करने का काम करती है. पलाश ब्रांड के नाम से तैयार इस प्रोडक्ट को इमली केक का नाम दिया गया है. आधा किलो का इमली केक बाजार में 45 रुपया में उपलब्ध है.
इमली केक बनाने वाली महिला समूह में कुछ ऐसी भी महिलाएं है जिनके लिये दो पैसे का रोजगार पाना किसी सपने से कम नहीं था. उम्र की ढलान पर ऐसी महिलाओं को घर बैठे एक ऐसा रोजगार मिल गया है, जो खुद को जिंदा रखने के साथ- साथ पूरे परिवार को जिंदा रखने में मददगार साबित हो रहा है. यही वजह है कि जो महिलाएं काम करने में असमर्थ हैं, उनकी बेटी उनके बदले काम कर रही है.

झारखंड में महिला समूह के काम की सराहना देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं. खूंटी जिले की ये महिलाएं दूसरी सभी महिलाओं के लिये किसी आदर्श से कम नहीं, जो हालात से मजबूर होकर घुटने टेकने के बजाय सर उठाकर पुरुषों के साथ कदम ताल कर रही है.
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