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जब लोगों से सीधे संपर्क के लिए अर्जुन मुंडा ने शुरू किया 'आपका CM' कार्यक्रम

News18Hindi
Updated: November 19, 2019, 12:34 PM IST
जब लोगों से सीधे संपर्क के लिए अर्जुन मुंडा ने शुरू किया 'आपका CM' कार्यक्रम
अर्जुन मुंडा झारखंड के पूर्व CM हैं और अपने कार्यकाल में नई-नई योजनाओं के लिए जाने जाते हैं.

अर्जुन मुंडा (Arjun Munda) ने अपने कार्यकाल में कुछ ऐसी योजनाएं चलाईं, जिनका जिक्र पूरे देश में हुआ. इसी वजह से उन्हें राजनीति के मास्टरमाइंड के तौर पर जाना जाता है.

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झारखंड की राजनीति में अर्जुन मुंडा की शख्सियत काफी बड़ी है यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें जनजातीय मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी. अर्जुन मुंडा इससे पहले तीन दफे झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्होंने उस दौरान अपनी कार्यशैली से खूब सुर्खियां बटोरी हैं. अर्जुन मुंडा ने मुख्यमंत्री रहने के दौरान जिन योजनाओं को झारखंड में शुरू किया उनकी गूंज देश के दूसरे राज्यों में भी खूब हुई. उनके मुख्यमंत्री काल में गरीबों के लिए कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना,दाल भात योजना की शुरूआत की गई जिससे गरीब परिवारों को भरपूर मदद मिली.

21 वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए दसवीं पास कर चुके छात्रों को लैपटॉप देने की योजना भी खूब सफल रही. अर्जुन मुंडा ने शासन में पारदर्शिता लाने के लिए इ टेंडरिंग की शुरूआत की और ‘आपका सीएम’ प्रोग्राम की शुरूआत कर लोगों से सीधा संपर्क साध कर लोगों का खूब दिल जीता. जनता से सीधा संवाद रखने वाले सीएम रहे अर्जुन मुंडा के लिए साल 2014 का विधानसभा चुनाव निराशाजनक रहा. वो खरसांवा विधानसभा सीट पर दशरथ गरगई से चुनाव हार गए और चौथी बार सीएम बनने का रिकॉर्ड नही बना सके. साल 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी बहुमत हासिल करने में सफल रही लेकिन खरसांवा सीट पर मिली हार की वजह से अर्जुन मुंडा की जगह रघुवर दास को मुख्यमंत्री बना दिया गया.

अर्जुन मुंडा को हालांकि साल 2014 में जमशेदपुर लोकसभा से चुनाव लड़ने को कहा जा रहा था लेकिन राज्य की राजनीति में मशगूल अर्जुन मुंडा यहां से जाने को तैयार नहीं दिखे. हालांकि साल 2009 में मुंडा जमशेदपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर जमशेदपुर का प्रतिनिधित्व करने लोकसभा पहुंचे थे और बीजेपी ने उन्हें आदिवासियों का उभरता चेहरा मानकर राष्ट्रीय महासचिव भी बनाया था लेकिन साल 2010 में उनकी राज्य मे वापसी हुई और वो मुख्यमंत्री बनाए गए. दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले अर्जुन मुंडा ने सितंबर 2010 से मार्च 2013 तक सरकार के मुखिया की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया. इससे पहले वो बाबूलाल मरांडी के हटने के बाद 18 मार्च 2003 से लेकर 2 मार्च 2005 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे. लेकिन इसके कुछ ही दिनों बाद 12 मार्च 2005 को उन्हें फिर से राज्य का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला और वो 14 सितंबर 2006 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे.

अर्जुन मुंडा को साल 2019 में खूंटी से लोकसभा चुनाव लड़ाया गया जहां से कभी बीजेपी के दिग्गज नेता करिया मुंडा चुनाव लड़ा करते थे. लेकिन पार्टी ने इस बार करिया मुंडा का टिकट काटकर अर्जुन मुंडा को चुनाव मैदान में उतारा. अर्जुन मुंडा 1445 वोटों के बेहद ही करीबी मार्जिन से चुनाव जीतने में कामयाब रहे. इस छोटी जीत के बावजूद झारखंड की राजनीति में अर्जुन मुंडा का सियासी कद बड़ा है तभी मोदी सरकार में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिली. मौजूदा केंद्र सरकार में झारखंड से अर्जुन मुंडा अकेला चेहरा हैं जो कि केंद्रीय मंत्री बने.

30 मई 2019 को मंत्री पद की शपथ लेने के बाद मुंडा ने मीडिया से कहा कि जंगल की जमीन और संसाधनों पर आदिवासियों का हक पहला है और उसे कोई नहीं छीन सकता है. अर्जुन मुंडा ने नीति निर्धारण की प्रक्रिया में आदिवासी समाज को शामिल करने और आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया.

अर्जुन मुंडा पहली बार साल 1995 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर विधायक बने थे और पृथक राज्य झारखंड बनवाने के लिए बेहद सक्रिय थे. बीजेपी उन दिनों अपने चुनावी घोषणा पत्र में घोषित कर चुकी थी कि उनकी सरकार बनने पर दक्षिण बिहार के हिस्से को अलग राज्य का दर्जा दिए जाएगा. साल 2000 में केंद्र की तत्कालीन वाजपेयी सरकार द्वारा झारखंड राज्य बनाए जाने की घोषणा के बाद अर्जुन मुंडा बीजेपी से खासे प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हो गए. साल 2000 में वो बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे और बाबू लाल मरांडी की सरकार में समाज कल्याण मंत्री बनाए गए.

समावेशी राजनीति में विश्वास रखने वाले अर्जुन मुंडा बाबू लाल मरांडी की डॉमिसाइल पॉलिटिक्स के उलट सबको साथ लेकर चलने की राजनीति को बखूबी अंजाम दिया. इसी वजह से अर्जुन मंडा प्रदेश की राजनीति में शिखर तक पहुंच पाने में कामयाब रहे हैं.
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अर्जुन मुंडा आदिवासी समुदाय से भले ही आते हों लेकिन वो हर समुदाय को साथ लेकर चलने की अदभुत क्षमता रखते हैं. वो गोल्फ और आर्चरी जैसे खेल में निपुण तो हैं ही साथ ही बंगाली,उडिया,हिन्दी,इंगलिश और कई जनजातीय भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखते हैं.

झारखंड जैसे राज्य में आदिवासियों के बीच गहरी पैठ रखने वाले अर्जुन मुंडा गैर-आदिवासियों के दिलों पर अपनी कार्यशौली से अमिट छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं. विधानसभा चुनाव में पार्टी उन्हें स्टार कैंपेनर की तौर पर जरूर पेश करेगी जिससे बीजेपी की सत्ता में वापसी सुनिश्चित किया जा सके.

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First published: November 19, 2019, 12:34 PM IST
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