Jharkhand: अंग्रेजों के जमाने का ये स्टेशन आज भी बुझा रहा मुसाफिरों की प्यास, पढ़ें एक खास किस्सा

झारखंड का गझण्डी स्टेशन बेहद खास है.

झारखंड का गझण्डी स्टेशन बेहद खास है.

झारखंड के कोडरमा में अंग्रेजों के जमाने का एक स्टेशन (Koderma Station) आज भी लोगों की प्यास बुझा रहा है. कई नजदीकी स्टेशनों पर यहीं से पानी का सप्लाई किया जाता है.

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रितेश लोहानी

कोडरमा. अंग्रेजों के शासन में भारत में एक छोर से दूसरे छोर तक रेलवे का जाल बिछाया गया था. गया-धनबाद रुट स्थित गझण्डी स्टेशन (Ghazandi Station) ब्रिटिश काल से ही काफी चर्चा में रही है. आज भी यहां से रेलवे की गतिविधि को अंजाम दिया जाता है. 1906 में बना इस स्टेशन का महत्व 3 टर्नल के कारण काफी महत्वपूर्ण था. बताया जाता है कि गया-धनबाद के बीच गझण्डी स्टेशन गार्ड और रेलवे ड्राइवर के लिए रेस्ट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, जो अब भी जारी है.

इस स्टेशन पर बने रेलवे क्वाटर में करीब 3 हज़ार से ज्यादा रेलकर्मी रहते थे. आज भी गझण्डी स्टेशन से ही कोडरमा जंक्शन के टेक्निकल कार्य किए जाते है. लेकिन गझण्डी स्टेशन अपने नजदीकी स्टेशनों के लोगों की प्यास बुझाने के लिए भी जाना जाता है. गझण्डी के पम्पू तालाब से पानी फ़िल्टर कर कभी गुमो (सुभाष चंद्र बोस स्टेशन) को भी पानी मुहैया कराता था.

कभी नहीं सूखता तालाब
पप्पू तालाब के बारे में लोगों का कहना है कि यह तालाब का जलस्तर काफी बेहतर है और कभी नहीं सूखता. इस तालाब की वजह से ही गझण्डी स्टेशन के आसपास इलाके में भीषण गर्मी में भी कभी पानी की दिक्कत नहीं हुई. गझण्डी स्टेशन पर रेस्ट करने वाले रेलकर्मी समेत स्थानीय लोगों को पम्पू तालाब ही प्यास बुझाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तालाब का पानी स्वच्छ कर पाइपलाइन के जरिए रेलवे क्वाटर और आसपास के स्टेशनों पर जाता है. पम्पू तालाब की वजह से लोगों की प्यास बुझ पाती है. हालांकि अब कई आसपास के स्टेशनों पर पीने का पानी का प्रबंध है, लेकिन उसके बाबजूद भीषण गर्मी में गझण्डी स्टेशन ही काम आता है.

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