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भक्ति और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र होने के बावजूद उपेक्षित है सतगांवा का महेश्वर धाम

यह किसी को मालूम नहीं कि कोडरमा में सतगांवा के महेश्वर धाम में भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग का उद्भव कब और कैसे हुआ
यह किसी को मालूम नहीं कि कोडरमा में सतगांवा के महेश्वर धाम में भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग का उद्भव कब और कैसे हुआ

शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने मंदिर के सौंदर्यीकरण का भरोसा दिलाया है. उन्होंने वन विभाग को इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ी निर्माण करने का भी निर्देश दिया है. पहाड़ी पर अवस्थित इस मंदिर से आसपास का नजारा भी देखने योग्य है. ऐसे में कुछ लोग पूजा अर्चना के अलावा यहां घूमने और प्रकृति के मनोरम दृश्य का आनंद लेने भी आते हैं.

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कोडरमा के सतगांवा का महेश्वर धाम भक्ति और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र होने के बावजूद आज तक उपेक्षित रहा है. कोडरमा गिरिडीह को जोड़ने वाली सकरी नदी के किनारे अवस्थित महेश्वरधाम की खासियत यह है कि यहां भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग का उद्भव कब और कैसे हुआ यह किसी को नहीं पता है. लेकिन सकरी नदी के किनारे पहाड़ पर शिवलिंग का उद्भव के बाद से आसपास के लोगों के लिए यह धाम श्रद्धा और भक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है. यहां हर रोज दर्जनों महिलाएं आकर भगवान भोले शंकर की आराधना में भजन कीर्तन और शिवचर्चा करती हैं.

मंदिर के पुरोहित रामानंद पांडेय बताते हैं कि सौ साल पहले भी यहां किसी ऋषि मुनि का वास था. उसी समय से लोग यहां आते हैं और भगवान शिव की आराधना करते हैं. तकरीबन 500 फीट ऊंची पहाड़ी पर
अवस्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए किसी तरह की सीढ़ी की व्यवस्था नहीं की गई है. पत्थरों को काटकर और पत्थरों को सजा कर किसी तरह इस मंदिर तक पहुंचने का इंतजाम जरूर किया गया है. कोई
अच्छा रास्ता नहीं होने के कारण ही भक्तों को मंदिर तक पहुंचने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं.
मगर अब शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने मंदिर के सौंदर्यीकरण का भरोसा दिलाया है. उन्होंने वन विभाग को इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ी निर्माण करने का भी निर्देश दिया है. पहाड़ी पर अवस्थित इस मंदिर से आसपास का नजारा भी देखने योग्य है. ऐसे में कुछ लोग पूजा अर्चना के अलावा यहां घूमने और प्रकृति के मनोरम दृश्य का आनंद भी लेने भी आते हैं.



बहरहाल शिक्षा मंत्री के निर्देशों के बाद जब इस इलाके का सौंदर्यीकरण कर दिया जाएगा तो इस इलाके को पर्यटन के क्षेत्र में भी विकसित किया जा सकता है. महेश्वर धाम मंदिर में शिवलिंग के उद्भव के बाद मंदिर का निर्माण किया गया और शिव पार्वती की प्रतिमा भी स्थापित की गई है. यहां आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि यहां उनकी हर मनोकामना पूरी होती है. ऐसे में कहा जा सकता हैं कि कोडरमा और गिरिडीह के आसपास के इलाके के लोगों के लिए ये धाम श्रद्धा और भक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.

(कोडरमा से समरेंद्र की रिपोर्ट)
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