Kodarma Lok Sabha Election Results 2019: अपनी सीट भी नहीं जीत पाए पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी
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Kodarma Lok Sabha Election Results 2019: अपनी सीट भी नहीं जीत पाए पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी
बाबूलाल मरांडी (फाइल फोटो)

पूर्व मुख्यमंत्री व जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी को कोडरमा सीट पर करारी हार मिली है. वह बीजेपी की अन्नपूर्णा देवी से हार गये हैं. jharkhand election results 2019, झारखंड, लोकसभा चुनाव परिणाम 2019 लाइव, झारखंड इलेक्शन रिजल्ट आज, jharkhand election results 2019,

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पूर्व मुख्यमंत्री व जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी कोडरमा सीट पर चुनाव हार गये हैं. बीजेपी की अन्नपूर्णा देवी ने उन्हें करारी हार हराया है. अन्नपूर्णा देवी को 753016 और बाबूलाल मरांडी को 297416 मत प्राप्त हुए. कोडरमा सीट इस बार 14 प्रत्याशी मैदान में थे. यहां पांचवें चरण में 6 मई को 66.92 फीसदी मतदान हुए थे. बाबूलाल मरांडी कोडरमा से 2004 और 2009 में सांसद रहे. वह सूबे के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं.

संताल समुदाय से आने वाले बाबूलाल एक समय सूबे में बीजेपी के बड़े नेता माने जाते थे. हालांकि बाद में उन्होंने बीजेपी छोड़कर झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली. बाबूलाल झारखंड से लगातार चार बार, 12वीं, 13वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा में सांसद रहे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वह 1998 से लेकर 2000 तक वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री भी रहे. 2014 की मोदी लहर में उनकी पार्टी जेवीएम का झारखंड में सुपड़ा साफ हो गया था.

शिक्षक की नौकरी छोड़ आरएसएस से जुड़े



बाबूलाल मरांडी का जन्म 11 जनवरी 1958 को गिरिडीह जिले के कोदई बैक गांव में हुआ. उन्‍होंने अपनी स्‍कूली शिक्षा गांव से प्राप्‍त करने के बाद गिरिडीह कॉलेज में दाखिला लिया, जहां से पहले इंटरमीडिएट फिर स्‍नातक की पढ़ाई पूरी की. बाबूलाल मरांडी ने एक साल तक प्राइमरी स्कूल में शिक्षक के तौर पर काम किया. इसी दौरान वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुडे. संघ के प्रचारक के लिए उन्होंने अपनी शिक्षक की नौकरी छोड़ दी. बाबूलाल मरांडी विश्व हिंदू परिषद के झारखंड क्षेत्र के सचिव भी रहे हैं. 1983 में वह गिरिडीह से दुमका चले गए और संघ के लिए काम किया.
शिबू सोरेन को कड़ी टक्कर देने पर बढ़ा कद

बाबूलाल मरांडी 1991 में बीजेपी के टिकट पर दुमका से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए. 1996 के लोकसभा चुनाव में दुमका में उनके सामने झारखंड के दिग्गज नेता शिबू सोरेन थे. इस मुकाबले में भी बाबूलाल को हार मिली, लेकिन हार का अंतर केवल 5 हजार वोट था. लिहाजा हार के बावजूद बाबूलाल मरांडी का पार्टी में कद बढ़ गया. उन्हें प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया.

अपने दम पर बीजेपी को दिलाई बड़ी जीत

बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में ही बीजेपी ने 1998 के लोकसभा चुनाव में झारखंड में बड़ी जीत हासिल की. पार्टी को 14 में से 12 सीटों पर विजय मिला. बाबूलाल इस चुनाव में दुमका सीट पर दिग्गज नेता शिबू सोरेन को हराया. यह उनके राजनीतिक करियर का शीर्ष दौर था. इस जीत के बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी शामिल किया गया.

अर्जुन मुंडा के लिए छोड़नी पड़ी सीएम की कुर्सी

साल 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बनने पर वह पहले मुख्यमंत्री बने. बाबूलाल मरांडी ने राजधानी रांची पर जनसंख्या और संसाधनों का दबाव कम करने के लिए ग्रेटर रांची स्थापित करने की योजना बनाई, लेकिन सहयोगी दल जनता दल (यूनाइटेड) के दबाव के चलते उन्हें मुख्यमंत्री की गद्दी अर्जुन मुंडा के लिए छोड़नी पड़ी. इसके बाद से उन्होंने राज्य की राजनीति से दूरी बनानी शुरू कर दी. हालांकि एनडीए राज्य में सत्तारूढ़ रही. 2004 के लोकसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी कोडरमा सीट से लड़े. बाबूलाल मरांडी इस चुनाव में झारखंड से जीतने वाले अकेले भाजपा उम्मीदवार थे. उनके अलावा यशवंत सिन्हा और रीता वर्मा को भी हार का सामना करना पड़ा था. इस दौरान उनके राज्य प्रभारियों से मतभेद बढ़ते गए और वह सार्वजनिक तौर पर राज्य सरकार की आलोचना करने लगे.

बीजेपी छोड़कर बनायी अपनी पार्टी

2006 में बाबूलाल मरांडी ने लोकसभा और भाजपा की सदस्यता से एकसाथ इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा नामक (जेवीएम) पार्टी का गठन किया. उनके साथ भाजपा के पांच विधायक भी जेवीएम में शामिल हो गये. कोडरमा लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में वह स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर लड़े और जीत हासिल की. 2009 के लोकसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी जेवीएम के टिकट पर लड़े और जीत हासिल की. हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में उऩकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई. जबकि बीजेपी को 14 में से 12 सीटें मिलीं. कोडरमा से बीजेपी के रवींद्र राय को जीत मिली. 2014 का चुनाव बाबूलाल अकेले लड़े, लेकिन इस बार महागठबंधन में शामिल होकर मैदान में उतरे.
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