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कोडरमा की बिटिया सौरभी मइती ने 56 देशों के प्रतिनिधियों को हरा जीता स्पीच कॉन्टेस्ट

News18 Jharkhand
Updated: February 4, 2019, 9:47 PM IST
कोडरमा की बिटिया सौरभी मइती ने 56 देशों के प्रतिनिधियों को हरा जीता स्पीच कॉन्टेस्ट
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के साथ सौरभी मइती (बाएं)

पहला स्थान लाने पर सौरभी को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के साथ लंच करने का भी मौका मिला. सौरभी बताती है कि भारतीय सभ्यता और कोरियन सभ्यता में काफी समानताएं हैं जिसके कारण उसने कोरियन लैंग्वेज की पढ़ाई शुरू की और उसे बेहतरीन मौका मिला.

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झारखंड के कोडरमा की एक बेटी सौरभी मइती ने 56 देशों के प्रतिनिधियों को हराते हुए दक्षिण कोरिया में आयोजित स्पीच कॉन्टेस्ट में पहला स्थान हासिल कर वहां भारत का परचम लहराया है. इस उपलब्धि के बाद सौरभी मइती कोरिया के सबसे बेहतरीन सियोल यूनिवर्सिटी में 6 महीने की पढ़ाई करने का मौका मिला है. दक्षिण कोरिया में भारत का झंडा गाड़ने के बाद कोडरमा की बेटी सौरभी मइती भारत लौट आई है.

साल 2018 के अंत में साउथ कोरिया में आयोजित कोरियन स्पीच कॉन्टेस्ट में सुरभि ने 56 देशों के प्रतिनिधियों को हराते हुए पहला स्थान हासिल किया है. इसके बाद बतौर इनाम सौरभी को कोरिया के सबसे बेहतरीन सीओल यूनिवर्सिटी में 6 महीने की पढ़ाई करने का अवसर प्राप्त हुआ है.

पहला स्थान लाने पर सौरभी को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के साथ लंच करने का भी मौका मिला. सौरभी बताती है कि भारतीय सभ्यता और कोरियन सभ्यता में काफी समानताएं हैं जिसके कारण उसने कोरियन लैंग्वेज की पढ़ाई शुरू की और उसे बेहतरीन मौका मिला.

कोरिया दूतावास की ओर से कोरियन कल्चर सेंटर में कोरियन लैंग्वेज की पढ़ाई होती है. इसी के तहत सौरभी ने भी कोरियन लैंग्वेज की पढ़ाई शुरू की. सौरभी भी मानती है कि सिर्फ कोरियन लैंग्वेज ही नहीं बल्कि किसी भी कंट्री की लैंग्वेज की पढ़ाई कैरियर के क्षेत्र में एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है. हर देश को इंटरप्रेटर की जरूरत होती है. ऐसे में लैंग्वेज की पढ़ाई काफी अहम है.

सौरभी मई महीने में सियोल यूनिवर्सिटी में 6 महीने की पढ़ाई के लिए दक्षिण कोरिया जाएंगी. पढ़ाई के लिए दक्षिण कोरिया की सरकार की ओर से उनको 65 हजार की छात्रवृत्ति भी मिली है.

पेशे से होम्योपैथ डॉक्टर सौरभी के पिता डॉ.एस मइती का कहना है कि बेटियां बोझ नहीं होती बल्कि बेटों से कहीं बेहतर होती है. उन्होंने बताया कि बेटियों की पढ़ाई में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी.अब वे काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.

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First published: February 4, 2019, 9:47 PM IST
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