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खून के अभाव में तड़प-तड़प कर मर गई छात्रा, पिता ब्लड बैंकों के चक्कर लगाता रह गया
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News18 Jharkhand
Updated: January 30, 2020, 3:44 PM IST
खून के अभाव में तड़प-तड़प कर मर गई छात्रा, पिता ब्लड बैंकों के चक्कर लगाता रह गया
छात्रा की मौत के बाद घर में मातम पसरा हुआ है.

पिता ने बताया कि बेटी की बीमारी के चक्कर में उसे कभी रांची तो कभी बनारस में डॉक्टरों के चक्कर काटने पड़े थे. परिवार आर्थिक परेशानी से भी जुझ रहा था. कर्ज लेकर इलाज कराने के बावजूद वह बेटी को नहीं बचा पाया.

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लातेहार. बेतला नेशनल पार्क से सटे कुटमू गांव में आठवीं की छात्रा (Girl Student) विद्यावती खून के अभाव में तड़प-तड़प कर मर (Die) गयी. जबकि पिता संजय पासवान खून (ए पॉजिटिव) के लिए ब्लड बैंकों (Blood Bank) के चक्कर लगाता रहा. विद्यावती एप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anemia) नामक बीमारी से ग्रसित थी. पिछले चार दिनों से उसकी हालत बिगड़ती गयी. करीब एक माह से उसे खून नहीं चढ़ाया गया था. चिकित्सकों (Doctors) ने यह सलाह दी थी कि 18 वर्ष की उम्र तक उसको हर माह खून चढ़ाना होगा. पिछले एक वर्ष में करीब 28 यूनिट खून किसी तरह से जुगाड़ कर पिता ने विद्यावती को चढ़ाया था.

दो ब्लड बैंकों से नहीं मिला खून 

विद्यावती के पिता संजय पासवान ने बताया कि लातेहार ब्लड बैंक ने उसे हर माह खून देने का भरोसा दिया था. पिछले माह खून दिया भी गया. लेकिन एक सप्ताह पहले जब वह फिर से खून के लिए ब्लड बैंक पहुंचा, तो ब्लड बैंक ने खून मौजूद नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया. इसके बाद उसने कई लोगों से खून देने की गुहार लगाई. एक संस्था ने उसे एक डोनर कार्ड उपलब्ध कराया. जब वह उस कार्ड लेकर को मेदिनीनगर ब्लड बैंक पहुंचा, तो वहां भी खून नहीं दिया गया. उसे यह बताया गया कि उस कार्ड पर खून नहीं मिलेगा. यदि खून लेना है, तो किसी व्यक्ति को लेकर आएं, ताकि खून के बदले खून दे सके.

तड़प-तड़प कर छात्रा की चली गई जान

पिता के मुताबिक निराश होकर वह घर लौट गया. उसी दिन मंगलवार रात को विद्यावती की हालत बिगड़ी और कुछ देर तड़पने के बाद उसकी मौत हो गई. विद्यावती आठवीं की छात्रा थी. 24 जनवरी को जैक द्वारा आयोजित आठवीं बोर्ड की परीक्षा में वह शामिल हुई थी. बतौर पिता बेटी की बीमारी के चक्कर में उसे कभी रांची तो कभी बनारस में डॉक्टरों के चक्कर काटने पड़े थे. परिवार आर्थिक परेशानी से भी जुझ रहा था. कर्ज लेकर इलाज कराने के बावजूद वह बेटी को नहीं बचा पाया.

ये है सरकारी नियम 

सरकार द्वारा यह नियम पारित है कि प्लास्टिक एनीमिया और थैलीसेमिया जैसे जानलेवा बीमारियों के लिए ब्लड बैंक को बिना किसी शर्त के खून उपलब्ध कराना है. लेकिन विद्यावती के लिए पलामू के मेदिनीनगर ब्लड बैंक और लातेहार जिले के लातेहार ब्लड बैंक ने खून नहीं दिया.लातेहार ब्लड बैंक के प्रभारी विनय कुमार सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि ए पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड जब-जब हमारे ब्लड बैंक में मौजूद रहा, तब तब हमने विद्यावती के लिए मुहैया कराया. परंतु जब हमारे ब्लड बैंक में ब्लड नहीं था, तो हम कहां से देते. यहां प्रचुर मात्रा में ब्लड नहीं रहता है.

 

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने छात्रा की मौत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस मामले की जांच होगी. और इसमें लापरवाही सामने आने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

इनपुट- विकास कुमार

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First published: January 30, 2020, 3:41 PM IST
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